शंखेश्वर जैन तीर्थ में मुमुक्षु अक्ष की दीक्षा, बने मुनि अर्हंगुणरत्नविजय

AYUSH ANTIMA
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रानीवाड़ा/जालौर (मदन माहेश्वरी): विश्वविख्यात श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन तीर्थ के 108 भक्तिविहार में आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वरजी की निश्रा में मुमुक्षु अक्ष कवाड की भव्य दीक्षा संपन्न हुई। दीक्षा के साथ ही अक्ष कवाड ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम जीवन अपनाते हुए मुनि अर्हंगुणरत्नविजय के रूप में नया आध्यात्मिक जीवन प्रारंभ किया। दीक्षा विधि के दौरान प्रातः काल चतुर्मुख परमात्मा की प्रदक्षिणा, देववंदना एवं पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। इसके पश्चात गुरु पूजन, रजोहरण अर्पण तथा संयम दीक्षा की विभिन्न धार्मिक विधियां सम्पन्न हुईं। जैसे ही आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वरजी ने मुमुक्षु को रजोहरण अर्पित किया, पूरा दीक्षा मंडप “दीक्षार्थी अमर रहे” के जयकारों से गूंज उठा। समारोह में बड़ी संख्या में साधु-साध्वी भगवंत, श्रद्धालु एवं परिजन उपस्थित रहे। पन्यास जितरत्न विजय, पन्यास नीतिरत्न विजय सहित अनेक संतों ने दीक्षा समारोह में सहभागिता कर आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान संयम उपकरणों की बोलियां भी लगाई गईं, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दीक्षा उपरांत मुनि अर्हंगुणरत्नविजय ने पांच महाव्रतों का पालन करने का संकल्प लिया। आचार्य ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जन्म, धर्म श्रवण, धर्म में श्रद्धा और धर्म आचरण अत्यंत दुर्लभ हैं तथा मुनि जीवन श्रेष्ठ आचरण का मार्ग है।
सायंकाल गुरुभगवंतों का विहार भुज (कच्छ) की ओर हुआ। जानकारी के अनुसार 15 जुलाई को भुज में चातुर्मास प्रवेश होगा तथा इसके पश्चात पालीताणा में उपधान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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