शटर बंद: दीवार के छेद और पाइप से बेची जा रही देर रात तक शराब

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: कहने को जिला पुलिस कप्तान की ओर से रात आठ बजे बाद शराब बेचने पर सख्ताई है लेकिन इसकी कितनी पालना हो रही है, इसकी बानगी रात आठ बजे बाद शराब ठेकों के पास देखी जा सकती है, जहां दीवार में एक बड़ा सा पाईप लगाकर खुलेआम शराब बेची जा रही है। इतना ही नहीं इस समय बेची जा रही शराब के रूपये भी दुगुने लिये जा रहे है। जो कही न कही ऑपरेशन नीलकंठ अभियान को धता बता रही है। शराब ठेका संचालक व सेल्समैन महज औपचारिक तौर पर 8 बजे ठेकों के शटर बंद कर देते हैं, लेकिन शटर के नीचे और पास में छोटे से लोहे के गुप्त गेट व ठेका की दीवार में बने छेद में से शराब बेचने का कारोबार बहुत तेजी से फल फूल रहा है। कोई भी थाना पुलिस और आबकारी विभाग दोनों ही रात आठ बजे बाद अवैध रूप से शराब बेचने वालों के खिलाफ कोई जरूरी कदम नहीं उठा रहे हैं। रात आठ बजे बाद शराब बेचे जाने का मुद्दा को लेकर सोशल मीडिया पर खूब विडियो वायरल हो चुके है। वहीं समाचार पत्रों की अनेक बार ये सुर्खियां भी बन चुकी है लेकिन इस ओर ना तो जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है और ना ही पुलिस प्रशासन इस ओर देख रहा है।

*मुख्य मार्गों व अस्पतालों के पास देर रात तक खुले रहते है शराब ठेके* 
मजे की बात तो यह है कि शहर के मुख्य मार्गों व अस्पतालों के पास स्थित शराब ठेके देर रात तक शराब बेचे देखे जा सकते है। सेटेलाइट अस्पताल रोड दुकान से सटकर शराब ठेका संचालित हो रहा है। यहां पर भी रात आठ बजे बाद धड़ल्ले से शराब बेची जा रही है। वहीं हरोलाई हनुमान मंदिर, सादुल सिंह सर्किल, गंगाशहर रोड, राजीव गांधी सर्किल, मॉडर्न मार्केट, बीछवाल रोड, भुट्टा चौराहा क्षेत्र में शराब ठेकेदार सभी नियमों को ताक पर रख रात आठ बजे बाद खुलेआम शराब बेच रहे है।
*पुलिस गश्त भी बेअसर*
दुकान के आगे का शटर बंद कर पीछे के गेट व दीवार में पाइप लगाकर हर शराब ठेकेदार बिक्री कर रहे हैं। कुछ दुकान के अंदर बैठाकर ही देर रात तक ग्राहकों को शराब पिला रहे हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस भी लगातार गश्त का दावा करती है। उसके बाद भी उनकी नजर इन दुकानों पर आखिर क्यों नहीं पड़ रही है। अवैध रूप से शराब बेचने वालों को कोई रोक-टोक तक नहीं रहा है।

*बच्चों पर पड़ रहा गलत असर*

शराब ठेका पर दीवार में एक बड़ा सा पाईप लगाकर खुलेआम शराब बेची जा रही है। शराब लेने वाले ग्राहक पहले सड़क के दोनों ओर देखते हैं और फिर तुरंत पैसे देकर चोर रास्ते से शराब व बीयर लेकर निकल जाते हैं, वहीं पास में बैठकर शराब भी पीते है। ऐसे में यहां से निकलने वाले राहगीरों व उनके साथ नौनिहालों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार शिक्षण संस्थान, धार्मिक स्थल से कम से कम 200 मीटर की दूरी तक शराब ठेका नहीं होना चाहिए।

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