झुंझुंनू (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): जिले के किसानों के चेहरे खिले। भारतीय किसान संघ, झुंझुंनूं की इकाई द्वारा चलाए गए 'किसान जागृति अभियान' के सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखने लगे हैं। इस पूरे अभियान के पीछे क्षेत्र में जागरूकता और किसानों के अथक प्रयास मुख्य कारण रहे हैं। डॉ.पवन चौधरी ने पिछले साल से गांव-गांव जाकर किसानों को जैविक खेती, पानी बचाने की नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को संगठित कर फसल के सही दाम दिलाने के लिए मंडी में सामूहिक बिक्री का मॉडल भी शुरू करवाया। इसी जागरूकता का नतीजा है कि इस बार झुंझुंनूं क्षेत्र में किसानों की लागत 20% तक घटी है और मुनाफा बढ़ा है। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष ने बताया कि "डॉ.पवन चौधरी ने हमें रास्ता दिखाया। उन्होंने हर किसान को समझाया कि जागरूकता ही खुशहाली की कुंजी है। आज उनके कारण ही किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।"
बिसाऊ के किसान रामेश्वर लाल ने कहा कि "पहले हमें नई तकनीक की जानकारी नहीं थी। डॉ.साहब की बैठकों से सीखकर हमने ड्रिप सिस्टम लगाया, गौ आधारित खेती, जैविक खेती, धरती माता का पोषण आदि सिखाया व समझाया, जिससे अब पानी भी बचा और पैदावार भी बढ़ी।"
डॉ.पवन चौधरी का कहना है कि "किसान देश की रीढ़ है। अगर किसान जागरूक होगा तो पूरा देश खुशहाल होगा। मेरा मकसद सिर्फ किसानों को उनका हक और सही जानकारी देना था।" इस जागृति अभियान से झुंझुंनूं जिले के 50 से ज्यादा गांवों के हजारों किसानों को सीधा फायदा पहुंचा है।