रानीवाड़ा/जालौर (मदन माहेश्वरी): वढियार प्रदेश की संस्कार प्रधान भूमि श्री समी गांव में सूरिप्रेमभुवनभानु समुदाय के 500 श्रमणी गणनायक आचार्य रश्मिरत्न सूरीश्वर तथा डहेला समुदाय के आचार्य पीयूष भद्रसूरीश्वर की निश्रा में शुक्रवार को तपागच्छाधिष्ठायक माणिभद्र वीर का प्रतिष्ठा महोत्सव उल्लासपूर्वक संपन्न हुआ।
प्रतिष्ठा का लाभ पंडितवर्य विमलेश भाई की माताजी सुशीलाबेन नरपत भाई झवेरी ने लिया। प्रतिष्ठा के पश्चात संघभोज का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर 40 वर्षों तक सेवा देने वाले देवाभाई का एक लाख रुपये का चेक देकर सम्मान किया गया। साथ ही भक्तिसूरीश्वर की गुरुमूर्ति की चल प्रतिष्ठा भी की गई। महावीर स्वामी जिनालय की प्रतिष्ठा के 12 वर्ष बाद संघ में प्रतिष्ठा का अवसर होने से अहमदाबाद, मुंबई और सूरत सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में समी मूल निवासी श्रद्धालु उत्सव में शामिल हुए। प्रतिष्ठा के बाद आयोजित धर्मसभा में आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वर ने कहा कि माणिभद्र वीर के रोम-रोम में शत्रुंजय के आदिनाथ दादा विराजमान थे। उन्होंने बताया कि इस दिन शत्रुंजय देरासर की 495वीं वर्षगांठ, गच्छाधिपति जयघोषसूरीश्वर की 76वीं तथा युगप्रधान आचार्यसम पन्यास चंद्रशेखरविजयजी की 74वीं दीक्षा तिथि भी थी। उन्होंने बताया कि हाल ही में शंखेश्वर में मु. अक्ष को दीक्षा देकर मुनि अर्हंगुणरत्नविजय के रूप में अपना 90वां शिष्य बनाया गया। साथ ही मु. रिद्धि बाफना को 27 जनवरी 2027 का दीक्षा मुहूर्त भी प्रदान किया गया।