साध मिलै तब हरि मिलै, सब सुख आनंद मूर। दादू संगति साध की, राम रह्या भरपूर।।
संतशिरोमणि महर्षि श्रीदादू दयाल जी महाराज कहते हैं कि जब राम की कृपा होती है, तब जीव को साधु पुरुषों का समागम प्राप्त होता है। उस समय भक्त के मन में श्रीहरि के प्रति भाव श्रद्धा प्रेमभक्ति हरि दर्शन की प्यास बढ़ जाती है। इसलिए हे राम ! कृपा करके मुझे साधु की संगति प्रदान करो, जिससे मेरे को शाश्वत सुख की प्राप्ति हो जाए और मेरा मन भक्ति में डूबा रहे। ब्रह्मा प्राप्ति के क्या क्या साधन है। सत्संगति, दान, विचार और संतोष यह ब्रह्मा प्राप्ति के साधन है। संत किसे कहते हैं श्रीमद्भागवत में बतलाया है कि राग, द्वेष से रहित तथा जिनका मोह मर गया तथा राम भक्ति में लगे हुए हैं। संतों का सदा सत्संग करो, भले ही वे उपदेश ना करें क्योंकि उनकी स्वभाविक बोलचाल है, वही उपदेश हो जाते हैं। जिसने शुद्ध साधु संगतिरूप गंगा में स्नान कर लिया, उसको दान, तीर्थाटन, तप, यज्ञ करने की क्या आवश्यकता है अर्थात सत्संगति से ही इन सबका फल मिल जाता है। महात्मा कविवर सुंदरदास जी महाराज साधु पुरुषों का समागम बुद्धि को बढ़ाने वाला, अज्ञान रूपी वृक्ष का नाशक आधिव्याधियों को नष्ट करने वाला है। उनकी संगति से विवेक रूपी दीपक प्रज्वलित हो जाता है।