शेखावाटी सेठ साहूकारों की खान रही है। यहां के भामाशाह सामाजिक सरोकार के लिए समर्पित थे। अस्पताल, स्कूल, कालेज, कुंए, बावड़ी बनवाकर समाज को समर्पित किये थे। हालांकि उनकी कर्मभूमि देश के किसी भी कोने में रही हो लेकिन उनका लगाव मातृभूमि से रहा और समय समय पर समाज हित के कामों को सर्वोपरि रखा। इन भामाशाहों का अपनी मातृभूमि से हमेशा ही भावनात्मक लगाव व अटूट रिश्ता रहा है। कभी व्यापारिक अभावों के कारण शेखावाटी से पलायन करने वाले इन परिवारों ने मुम्बई और कोलकाता जैसे शहरो में अपना साम्राज्य स्थापित किया। जिनमे बिरला, मितल, गोयनका, डालमिया, सोमानी, सिंघानिया व पीरामल प्रमुख हैं। समय बदला, सामाजिक सरोकार पर अर्थ युग हावी हो गया। जिन्होंने अपने पुरखो के नाम को जीवंत रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और समाज हित के कार्यों को प्राथमिकता दी, वहीं विरासत अब मिटने के कगार पर है। इन भामाशाहों ने समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक स्कूल व कालेज बनवाए लेकिन शिक्षा को व्यापार न समझकर जनसेवा की भावना से इन कार्यों को अंजाम दिया। पर्यटन स्थल को लेकर शेखावाटी में अनेक हवेलियां इन्हीं भामाशाहों की देन है लेकिन रख रखाव या भू-माफियों को जद में आकर अपना मूल स्वरूप खोने के कगार पर है। यहां के भामाशाहों ने समय समय पर जनहित व जनसेवा के कार्यों को अंजाम देकर अपनी मातृभूमि का ऋण चुकाया है। यहां निर्मित हवेलियां, उनके उस लगाव के निशान जिसके कारण शेखावाटी में हवेलियों को खुला संग्रहालय कहा जाता है। शेखावाटी को धार्मिक राजधानी भी कहा जाता है क्योंकि यहां विश्व प्रसिद्ध मंदिर होने के साथ ही महान संतों की तपोभूमि भी रही है। वर्तमान में शेखावाटी को पर्यटन के रूप में बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा भी प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान की भजन लाल शर्मा सरकार ने अपनी योजनाओं के तहत हवेलियो के संरक्षण व जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों का बजट निर्धारित किया है। यदि पर्यटन में विस्तार होता है तो इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और शहरों की तरफ पलायन भी रुकेगा।
मातृभूमि के विकास और रोजगार सृजन को लेकर शेखावाटी में एक नई पहल की आवश्यकता है। ग्रामीण व हस्तशिल्प को बढ़ावा देकर इन भामाशाहों के साथ जुड़ाव स्थापित करने के प्रयास होने चाहिए। अब एक ज्वलंत प्रश्न खड़ा होता है कि अपने पूर्वजों की ऐतिहासिक धरोहर को इतिहास बनाया जा रहा है। आखिर कौन से कारक है, जिनकी वजह से इन भामाशाहों का अपनी मातृभूमि के प्रति लगाव कम होने के साथ ही मोह भंग हो रहा है।