गांव के गुवाड़ से उपराष्ट्रपति तक का सफर

AYUSH ANTIMA
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राजस्थान के कद्दावर भाजपा नेता एवं पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत का जन्म 23 अक्टूबर 1923 को सीकर जिले के एक छोटे से गांव खाचरियावास में हुआ था। अपनी सादगी और जमीनी जुडाव के चलते भैरोसिंह शेखावत बाबोसा (परिवार का मुखिया) के नाम से मशहूर थे। उन्होंने तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। बाबोसा का राजनीतिक सफर अत्यन्त साधारण परिस्थितयों से शुरु होकर एक पुलिसकर्मी से राजस्थान के मुख्यमंत्री और फिर देश के उप राष्ट्रपति बनने का एक प्रेरणादायक अध्याय है। वे तत्कालीन सीकर रियासत के पुलिस सब इंस्पेक्टर थे। इस नौकरी से इस्तीफा देने के बाद सक्रिय राजनीति में आने का निर्णय लिया। 1950 मे जनसंघ में शामिल हो गये। 1952 के प्रथम राजस्थान विधानसभा चुनावों में उन्हें जनसंघ की टिकट पर दातारामगढ़ से चुनाव लड़ने का मौका मिला। दिलचस्प बात यह थी कि उस समय जनसंघ को दातारामगढ़ से उम्मीदवार नहीं मिल रहा था तब उनके भाई बिशन सिंह के सुझाव पर उन्हें टिकट दिया गया और वे विधानसभा पहुंचे। 1995 के आपातकाल के दौरान महीनों तक जेल मे रहना पड़ा, जिसने उन्हें कद्दावर विपक्ष के नेता के रूप में स्थापित किया। 1977 में जब राजस्थान में गैर कांग्रेसी सरकार के मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने समाज के सबसे ग़रीब और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए अन्तोदय योजना शुरू की थी। यह योजना इतनी सफल और क्रान्तिकारी थी कि बाद मे अन्य राज्यों व केंद्र सरकार द्वारा अपनाया गया था। उनके द्वारा गरीबों के उत्थान के लिए किए गये कार्यों के कारण विश्व बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष ने रॉकफेलर ऑफ इंडिया की उपाधि से विभूषित किया था। इसी कारण बाबोसा अंत्योदय योजना के जनक के रूप में जाने जाते हैं। बाबोसा भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, उन्होंने राजस्थान में पार्टी को मजबूत आधार प्रदान करने में अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे राजस्थान के एक एक क्षेत्र में जाकर पार्टी के लिए जन समर्थन जुटाते थे, जिससे भाजपा एक गांव ढाणी तक पहुंचने वाली पार्टी बनी। बाबोसा न केवल एक कुशल राजनेता थे बल्कि जमीनी कार्यकर्ता भी थे, जिन्होंने राजस्थान में भाजपा को वटवृक्ष के रूप में खड़ा किया। बाबोसा भारतीय राजनीति में दिग्गज व अजातशत्रु नेता थे। उनका मानना था कि राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता केवल विरोधी होते हैं। वे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वीयो को भी उतना ही सम्मान देते थे, जितना सहयोगियों को। बाबोसा तीक्ष्ण बुद्धि, हाजिर जवाबी और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते थे, जिसमें वे राजस्थान की राजनीति के पुरोधा माने जाते थे। भारतीय राजनीति में गांव के गुवाड़ से उप राष्ट्रपति तक का सफर करने वाले बाबोसा की पुण्यतिथि पर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) परिवार की तरफ से श्रध्दापूर्वक विनम्र श्रद्धांजलि।

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