शेखावाटी जकात आंदोलन का सफल नेतृत्व पंडित नरोतम लाल जोशी ने किया था। इस आंदोलन की सक्रिय भूमिका में रामनारायण चौधरी, हरलाल सिंह खर्रा, नेतराम सिंह व मास्टर चंद्रभान सिंह का नाम भी आता है। शेखावाटी के जकात (कर) के विरोध में आंदोलन, जिसको आम तौर पर जकात आंदोलन या शेखावाटी आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। इस आंदोलन के प्रणेता के रुप में पंडित नरोतम लाल जोशी का नाम सर्वप्रथम आता है। जकात एक प्रकार का वह कर था, जो सामंतों द्वारा किसानों व व्यापारियों पर वस्तु की आवाजाही को लेकर लगाया जाता था। इसके अलावा भू राजस्व वृध्दि व अत्याचार भी आंदोलन के प्रमुख कारण थे। झुन्झुनू स्थित विधार्थी भवन, जिसे सरदार हरलाल सिंह ने स्थापित किया था, आंदोलन की गतिविधियों का मुख्य केन्द्र था। लगातार संघर्ष के कारण सामंती व्यवस्था को राहत प्रदान करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। पंडित नरोतम लाल जोशी झुन्झुनू से विधायक बनकर प्रथम राजस्थान विधानसभा के निर्विरोध अध्यक्ष मनोनीत किए गये थे। 1957 के आम चुनाव में पंडित नरोतम लाल जोशी को विजय हासिल हुई, तत्पश्चात् झुंझुनूं में विप्र समाज राजनीतिक रूप से हासिए पर चला गया क्योंकि समाज को पंडित नरोतम लाल जोशी जैसा प्रबुद्ध व जुझारू नेतृत्व नहीं मिल सका। यह भी सर्वविदित है कि संगठित समाज ही राजनितिक पिच पर लंबी पारी खेल सकता है। इसी कारण विप्र समाज में बिखराव होने के साथ ही वर्चस्व की लडाई में खुद को तो राजनीतिक पटल पर प्रतिपादित नहीं कर सके बल्कि समाज को भी राजनीतिक रूप से पंगु बना दिया। अलग अलग धड़ों में बंटकर सामाजिक व राजनीतिक रूप से समाज कमजोर होता चला गया और इसी कारण उनकी इस असंगठित होने की कमजोरी को भांपते हुए राजनीतिक दलों ने भी टिकट के मामले में दूरी बनानी शुरू कर दी, उसका खामियाजा समाज आज तक भुगत रहा है। यह सर्वविदित है कि संगठन में ही शक्ति होती है, जिसका उदाहरण हमें अन्य समाजों में देखने को मिल रहा है। यह जिले का दुर्भाग्य है कि पंडित नरोतम लाल जोशी के बाद विप्र समाज कोई सशक्त नेतृत्व तैयार नहीं कर पाया। आज जरूरत है एक ऐसे सशक्त नेतृत्व की, जो राजनीतिक पटल पर समाज को सम्मानित प्रतिनिधित्व प्रदान कर सके।
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