हिन्दी जगत के प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद पत्रकारिता को सामाजिक परिवर्तन, जनता से संवाद और निर्भीक वैचारिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम मानते थे। उन्होंने हंस और जागरण जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से सामंतवाद, औपनिवेशिक शोषण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जन चेतना जगाई। उनकी पत्रकारिता साहित्य की तरह उद्देश्यपूर्ण, नैतिक और शोषित के प्रति समर्पित थी। उन्होंने आर्थिक तंगी और सरकारी जुर्माने के बावजूद निडर होकर सच लिखा और अपनी कलम को बिकने नहीं दिया। प्रेमचंद का मानना था कि पत्रकार को जनता के प्रति जबाबदेह होना चाहिए न कि उनकी कलम सरकार की ड्योढ़ी पर मुजरा करे। इसी श्रेणी में शेखावाटी के एक महान व राजस्थान में पत्रकारिता के भीष्म पितामह पंडित झाबरमल शर्मा का नाम भी आता है। पंडित भंवर लाल शर्मा मेरे पत्रकारिकता व कलम को उठाने के प्रेरणास्रोत हैं। प्रेस की स्वतंत्रता केवल पत्रकारों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि सम्पूर्ण समाज का मूलभूत अधिकार भी है। यह लोकतंत्र की वह जीवन शक्ति है, जो उसे निरंतर जीवंत पारदर्शी और गतिशील बनाए रखती है। आज जब भारत सूचना और डिजिटल संचार युग में प्रवेश कर चुका है तो प्रेस की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण और उत्तरदायित्व पूर्ण हो जाती है। ऐसी स्थिति में आवश्यकता इस बात की है कि प्रेस न केवल स्वतन्त्र हो बल्कि उत्तरदायी भी हो, न केवल साहसी हो बल्कि नैतिक मूल्यों से सम्पन्न भी हो। आमजन को इस बात का आभास होना चाहिए कि जब तक प्रेस स्वतंत्र है, हमारा लोकतंत्र जीवित है लेकिन मिडिया संस्थानों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष राजनीतिक दबाव डालने के प्रयास देखे गये है, जिससे समाचार पत्रों की निष्पक्ष प्रस्तुति प्रभावित होती है और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता सीमित हो जाती है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता दे रखी है और लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रुप में विख्यात भी है। यह बिना सेंसरशिप के जानकारी साझा करने का अधिकार देती है लेकिन आधुनिक परिवेश में भारतीय पत्रकारिता की विश्वसनीयता इसी बात से इंगित होती है कि भारत 180 देशों में 157वे स्थान पर है। पिछले वर्ष भारत 151वे स्थान पर था, जिससे यह गिरावट गंभीर श्रेणी में आती है। अंत में प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर सभी उन सभी निर्भीक, निष्पक्ष व स्वतन्त्र पत्रकारों को हार्दिक शुभकामनाएं, जो इस आर्थिक युग मे पत्रकारिता के मूल्यों को जीवंत रखकर निरन्तर अपनी लेखनी से समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं।
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