महिला आरक्षण बिल महिला सशक्तिकरण नहीं, मोदी संरक्षण

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: देश में महिला आरक्षण बिल के गिर जाने के बाद राजनीतिक तापमान चरम पर है। भाजपा जहां विपक्षी दलों को 'महिला विरोधी' करार देकर सड़कों पर उतर आई है, वहीं कांग्रेस ने भी अपने पलटवार के लिए महिला नेताओं के जरिए भाजपा को जवाब की तैयारी कर रही हैं और वहीं अब कांग्रेस ने पलटवार करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बीकानेर शहर व देहात की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस की पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया ने जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने परिसीमन से जोड़कर इसे टालने के सरकारी रवैये को "महिला सशक्तिकरण नहीं, मोदी संरक्षण" बताया। पूनिया ने कहा कि कांग्रेस ने मांग की है कि 2023 में पारित कानून को बिना किसी "परिसीमन" या "जनगणना" की शर्त के तुरंत लागू किया जाए। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन थोपकर अगले चुनावों में राजनीतिक लाभ और सत्ता बचाना चाहती है।

*कानून बना, लेकिन लागू नहीं*

पूनिया ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद से पारित हो चुका है और आज भी प्रभावी है, लेकिन सरकार इसे लागू करने में देरी कर रही है। उन्होंने देर रात अधिसूचना जारी करने को सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करने वाला बताया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसे टालने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। सोनिया गांधी के विचारों का हवाला देते हुए कहा गया कि सीटों का बंटवारा संतुलित और निष्पक्ष होना चाहिए।

*543 सीटों पर तुरंत लागू हो आरक्षण*

कांग्रेस ने मांग रखी कि वर्तमान 543 लोकसभा सीटों पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए और इसमें दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी उचित हिस्सेदारी मिले। नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा गया कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सरकार की नीयत साफ नहीं है और इस विषय का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है।

*महिला प्रतिनिधित्व और सुरक्षा पर सवाल*

कांग्रेस ने भाजपा पर महिला प्रतिनिधित्व कम होने का आरोप लगाया और कहा कि महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित है। साथ ही, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए। नायक ने कहा कि आने वाले संसद सत्र में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
*ये रहे मौजूद*
प्रेस वार्ता के दौरान शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल, ओबीसी की देहात अध्यक्ष उमा करल, प्रदेश कार्यकारिणी पदाधिकारी सुशीला सींवर, शर्मिला पंचारिया सहित अनेक जने मौजूद रहे।

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