21वीं सदी में समग्र विकास विषय पर एक दिन की होगी अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय और बेसिक पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में '21वीं सदी में समग्र विकास: विज्ञान, समाज और निरंतरता का एकीकरण’ विषयक एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस 29 अप्रैल को लक्ष्मी हैरिटेज में आयोजित की जाएगी। कॉन्फ्रेन्स संयोजक एवं महाविद्यालय प्राचार्य डॉ.सुरेश पुरोहित ने बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विषय विशेषज्ञों के रूप में राष्ट्रीय सुपरकम्प्यूटिंग मिशन निदेशालय में वर्टिकल हेड प्रमुख डॉ.मंगला एन, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,दिल्ली (भारत) के प्रोफेसर और डीन (स्टार्टअप और आईपीआर) डॉ.उज्ज्वल कल्ला, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं इनोवेशन सेल के निदेशक मोहित गंभीर, अमेरिका के ड्यूश बैंक के निदेशक पंकज ओझा, सैद्धांतिक भौतिकी, गणितज्ञ एवं दर्शनशास्त्री प्रोफेसर (डॉ.) देव अरस्तू पंचारिया आदि शामिल होंगे।डॉ.पुरोहित ने बताया कि इस अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र के साथ चार तकनीकी सत्र भी रखे गये हैं। इन तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लगभग 500 से अधिक प्राचार्य, प्रोफेसर, शोधार्थी एवं विद्यार्थी भाग लेंगे।कॉन्फ्रेंस में महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित, बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ.अखिल रंजन गर्ग, राजुवास के कुलगुरु डॉ.सुमन्त व्यास, एसकेआरएयू के कुलगुरु डॉ.राजेन्द्र बाबू दुबे, संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, बीकानेर रेंज के आईजी ओमप्रकाश शामिल होंगे।आयोजन सचिव डॉ.रोशनी शर्मा ने बताया कि 21वीं सदी को संभावनाओं और चुनौतियों के संगम के रूप में देखा जा रहा है।एक ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और डिजिटल क्रांति ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है;वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन,जैव विविधता का क्षरण,सामाजिक असमानता, मानसिक स्वास्थ्य संकट और नैतिक दुविधाएँ हमारे समक्ष गंभीर प्रश्न बने हुए हैं। डॉ.शर्मा ने बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक प्रगति, सामाजिक समावेशन और सतत विकास के बीच संतुलित समन्वय स्थापित करना है। इस कॉन्फ्रेंस का लक्ष्य एक ऐसे समग्र विकास मॉडल को बढ़ावा देना है, जो मानव कल्याण, पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करे। कॉन्फ्रेंस के संरक्षक रामजी व्यास ने बताया कि यह अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहाँ वे नवाचार, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सकें। इसके माध्यम से ज्ञान के आदान-प्रदान, अंतःविषयक सहयोग और व्यावहारिक समाधानों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वैश्विक चुनौतियों जैसे-जलवायु परिवर्तन, असमानता और संसाधनों के सतत उपयोग का प्रभावी समाधान खोजा जा सके। व्यास ने बताया कि वास्तविक विकास वह है, जो मानवता के समग्र उत्थान, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संतुलन को साथ लेकर आगे बढ़े।

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