चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): कस्बे की होनहार बेटी मोक्षा अग्रवाल की ऐतिहासिक उपलब्धि पर अग्रवाल समाज के लोगों द्वारा मोक्षा व उनके परिजनों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर अग्रवाल जन कल्याण समिति चिड़ावा के पूर्व अध्यक्ष दामोदर प्रसाद हिम्मतरामका की अगुवाई में तथा श्रीश्याम मंदिर चिड़ावा धाम के मुख्य महंत राजू जी के सानिध्य में मोक्षा और उनके परिजनों का साफा, माला और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया। इस मौके पर हिम्मतरामका ने कहा कि मोक्षा की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा है। अब समय आ गया है कि समाज के युवा शासन और प्रशासन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि घर पर रहकर, सीमित संसाधनों में पढ़ाई करते हुए मोक्षा ने जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बनेगा। पूर्वी राजस्थान अग्रवाल सम्मेलन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष झंडी प्रसाद हिम्मतरामका, व्यापार मंडल चिड़ावा के अध्यक्ष महेश मालानी ने अपना बधाई संदेश भेजा और शुभकामना दी। इस मौके पर अग्रवाल जन कल्याण समिति के संस्थापक पूर्व महामंत्री प्रदीप मोदी, प्रदीप हिम्मतरामका, युवा वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री अनुज भगेरिया, नगर पालिका के पूर्व सहवृत्त सदस्य कपिल भगेरिया, युवा अग्रवाल सम्मेलन के पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र मोदी, अमित सुशील गोयल, बाल कल्याण समिति की पूर्व सदस्य एवं पूर्व सहवृत्त सदस्य मनीषा केडिया के साथ—साथ व्यवसायी श्रीकांत—तारादेवी हलवाई, अशोक—संतोष हलवाई, विशाल, आलोक, हेमंत, रवि, अनिता, पूजा, पायल, सोनू, सिया, आसी, कार्तिकेय आदि भी मौजूद थे। गौरतलब है कि मोक्षा अग्रवाल ने एसएससी सीजीएल परीक्षा में ऑल इंडिया 43वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे शेखावाटी और अग्रवाल समाज का नाम रोशन किया है। इस सफलता के साथ उनका चयन केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग में इंस्पेक्टर पद पर हुआ है। करीब 1.30 लाख अभ्यर्थियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच केवल लगभग 15 हजार उम्मीदवार ही अंतिम चयन सूची तक पहुंच सके। ऐसे कठिन माहौल में 43वीं रैंक प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मोक्षा की सफलता के पीछे उनकी तीन वर्षों की सतत मेहनत और अनुशासन रहा। उन्होंने एक ही कमरे में रहकर पढ़ाई की और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। उनका मानना है कि सफलता के लिए फोकस और निरंतरता सबसे जरूरी है। यह सम्मान न केवल एक उपलब्धि का जश्न था। बल्कि यह संदेश भी देता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो छोटे कस्बों की बेटियां भी देशभर में अपनी पहचान बना सकती हैं। मोक्षा अग्रवाल की सफलता आज बदलते भारत की नई तस्वीर पेश कर रही है। जहां प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं।
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