निवाई (लालचंद माली): उपखंड क्षेत्र के नटवाड़ा गांव में अक्षय तृतीया पर आयोजित पारंपरिक सकून कार्यक्रम में इस बार सुकाल के संकेत मिले हैं। बद्री विशाल भगवान मंदिर के शिखर पर स्थापित ध्वजा पर सुबह करीब 9 बजे सबसे पहले तोता आकर बैठा और कुछ ही क्षणों बाद उड़ गया। ग्रामीणों ने इसे सुकाल का संकेत मानते हुए अच्छी बारिश और बेहतर फसल की उम्मीद जताई है। गौरतलब है कि इस परंपरा के तहत नटवाडा ध्वजा को विशेष मंत्रोच्चार के साथ सुबह 7:15 बजे ठिकाने से रवाना किया गया, जिसे मंदिर पहुंचाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ध्वजा को गर्भगृह में ले जाकर भगवान बद्री विशाल के चरणों से स्पर्श कराया गया और मंदिर के शिखर पर स्थापित किया गया। मान्यता के अनुसार ध्वजा शिखर पर चढ़ाने के बाद जो भी पक्षी सबसे पहले बैठता है, वही पूरे साल के अकाल या सुकाल का संकेत देता है। इस बार सबसे पहले तोता बैठने से इसे शुभ संकेत माना जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार तोते का बैठना सामान्य से अच्छी वर्षा और फसल का प्रतीक होता है, जबकि तोते का जोड़ा बैठना और भी बेहतर सुकाल माना जाता है। इसके विपरीत कौआ बैठना अकाल का संकेत माना जाता है, जबकि कबूतर, कमेड़ी, गुग्गुल या चिड़ी जैसे अन्य पक्षियों का बैठना मध्यम वर्षा का अनुमान दर्शाता है। यह ध्वजा कुंवर पुण्य प्रताप करण द्वारा परंपरानुसार लाई गई थी। जैसे ही तोता शिखर पर बैठा मौके पर मौजूद ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ गई। अब क्षेत्र के किसान इस संकेत को शुभ मानते हुए आने वाले कृषि सीजन को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं।
3/related/default