श्रीमद्भागवत कथा जीवन की सार्थकता का प्रेरक उदाहरण

AYUSH ANTIMA
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रानीवाड़ा (मदन माहेश्वरी): गोलोकवासी श्रीमती लवगादेवी धर्मपत्नी मोनाजी की पुण्य स्मृति में गौ भक्त एवं गोव्रती परिवार गोभक्त श्रीमती डाईदेवी धर्मपत्नी करनाजी पुत्र मोनाजी पुरोहित धानोल के सुपोत्र पारसमल, करसन कुमार, गोवत्स नरेन्द्र, प्रीतेश कुमार पुरोहित परिवार धानोल द्वारा आयोजित वेदलक्षणा गौ नन्दीकृपा महोत्सव के तहत श्रीमदभागवत कथा के चौथे दिन संत अभयदास महाराज ने कहा कि पूरे संसार में परम वैष्णव भगवान शिव ही है। भगवान शिव ठाकुर जी अर्थात विष्णु भगवान का स्मरण करते है और विष्णु शंकर जी का स्मरण करते है। उन्होंने कहा कि शैव, वैष्णव आदि परम्पराओं में आराध्य के नाम पर जो भेद है, वह केवल कथित रूप से है। उससे भी ऊपर सार्वभौमिक रूप से भगवान शिव और विष्णु में कोई भेद  नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि भगवानों और अवतारों की वह भारत भूमि धन्य है जहां सूर्य भगवान वर्ष भर हर दिन दृश्यमान होते है और अपनी ऊर्जा से सभी को ओतप्रोत करते है। कई देश तो ऐसे है, जहां 6 माह दिन होता है और 6 माह की रात होती है। इसलिए भारत भूमि को वंदन है अभिनंदन है। संत अभयदास ने कहा कि यह केवल भारत भूमि है, जहां जन्म लेकर अगले पड़ाव यानि मरने के बाद की यात्रा को भी सुनिश्चित किया जा सकता है। यह दर्शन केवल सनातन शास्त्र ही प्रतिपादित करता है।

 *कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव भी मनाया*

कथा के चतुर्थ दिवस पर  वृन्दावन बिहारी की अनुपम झाकियां, जिसमे कृष्ण बाल रूप, बाल मुकुंद, नंद बाबा की झांकी, सभी को मनमोहक और मन्त्र मुक्त कर दिया। जिसमे उपस्थित कथा का श्रवण करने वाले भक्तजन देवतुल्य पुरूष एवम मात्र शक्ति कृष्ण प्राकृत्य पर झूमते खेलते गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाते, थिरकते पांव मंगल गीत के साथ, भावविभोर होकर अनुपम होकर दृश्य, जाखोब गंग सरोवर के तट, आनंद वन्दन में भक्तिमय का माहौल को सम्पूर्ण जिले में भक्ति रस के रूप मे कृष्ण मय हो गया।

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