अग्रवाल करेंगे सुधांश पंत पर हमला: जांच की आंच जा सकती है दिल्ली

AYUSH ANTIMA
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अभी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की औपचारिक पूछताछ शुरू भले नहीं हुई हो, लेकिन संकेत साफ हैं कि जैसे ही सुबोध अग्रवाल जांच की मेज पर बैठेंगे, वे बचाव की मुद्रा में नहीं, बल्कि सीधा पलटवार करेंगे। यह पूछताछ एकतरफा नहीं रहने वाली है। इसे वे “जवाबी हमले” में बदलने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। अग्रवाल के निकटवर्ती सूत्र ने बताया कि उनकी रणनीति साफ है। वे खुद को अकेला बलि का बकरा बनने नहीं देंगे। उनका पहला और सबसे तीखा वार होगा सुधांश पंत पर। वे एसीबी के सामने उन फाइलों का पुलिंदा खोलने की तैयारी में हैं, जो अब तक सचिवालय की धूल खाती अलमारियों में दबाकर रखी गई थीं। अग्रवाल का तर्क सीधा और खतरनाक होगा कि “जिस घोटाले की पटकथा मेरे आने से पहले लिखी जा चुकी थी, उसका पूरा दोष मेरे सिर पर क्यो।" वे एसीबी से सीधा सवाल दागेंगे कि 15 जनवरी 2021 से 18 अप्रैल 2022 के बीच लगभग ₹605 करोड़ के टेंडर किसके नेतृत्व में पास हुए। जब वित्त समिति की कमान सुधांश पंत के हाथ में थी, तो जांच की सुई केवल एक ही व्यक्ति पर क्यों अटक गई। सूत्रो ने बताया कि अग्रवाल इस पूरे मामले को सलेक्टिव इन्वेस्टीगेशन करार देते हुए जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर भी सीधा सवाल उठाने की तैयारी में हैं। वे यह भी याद दिलाएंगे कि फर्जी IRCON सर्टिफिकेट के आधार पर कंपनियों को अयोग्य घोषित करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का कदम उन्होंने उठाया, जबकि उन्हीं कंपनियों को पहले खुलेआम ठेके बांटे गए थे। हालांकि ईडी पंत को पहले ही क्लीन चिट दे चुकी है। अब असली टकराव यहीं से शुरू होगा। दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर बैठे सुधांश पंत को सीधे घेरे में लाने की रणनीति के तहत अग्रवाल एसीबी को उन दस्तावेजों, नोटशीट्स और हस्ताक्षरों तक ले जाने का दावा करेंगे, जहां से इन विवादित फर्मों को “संरक्षण” मिला। पूछताछ में उनका सबसे बड़ा दांव यही होगा कि “अगर मैं दोषी हूं, तो अकेला नहीं हूं।” वे यह सवाल बार-बार उठाएंगे कि निर्णय लेने वाली शीर्ष समिति के अध्यक्ष की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही। यह मामला अब सिर्फ एक अधिकारी के बचाव तक सीमित नहीं रहेगा। यह सीधे-सीधे दो वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच टकराव, फाइलों में दबी सच्चाई और एसीबी की निष्पक्षता की अग्नि परीक्षा बनने जा रहा है। अगर अग्रवाल अपने पत्ते सही समय पर खोलते हैं, तो जांच की दिशा ही बदल सकती है और कई नाम, जो अब तक परदे के पीछे सुरक्षित थे, अचानक सुर्खियों के केंद्र में आ सकते हैं।

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