नारी शक्ति के सम्मान में जन आक्रोश, राहुल का फूंका पुतला

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में पारित न किए जाने को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के असहयोग के चलते बिल पास नहीं हो सका, जिसके बाद एनडीए ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बीकानेर में दो अलग जगहों पर प्रदर्शन कर राहुल गांधी का पुतला फूंका गया है। भाजपा की ओर से महारानी सुदर्शन महाविद्यालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। महिलाओं ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की और कांग्रेस व विपक्ष के नेता राहुल गांधी का पुतला दहन कर अपना रोष प्रकट किया। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने कहा कि यह प्रदर्शन नारी सम्मान,अधिकार और सशक्तिकरण के समर्थन में एक सशक्त संदेश है। संयोजक सुषमा बिस्सा ने विपक्ष पर महिला मुद्दों को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। नेताओं का कहना है कि जो दल पहले महिला सशक्तिकरण का विरोध करते रहे, वही अब राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे पर बयानबाजी कर रहे हैं।इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति की उपस्थिति रही और सभी ने एक स्वर में नारी सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया।
*सरकारी कॉलेज में प्रदर्शन बना चर्चा का विषय*
सत्ताधारी पार्टी की ओर से सरकारी कॉलेज में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध में किये गये प्रदर्शन को लेकर चर्चा का विषय बन गया। विपक्ष का आरोप है कि अगर कॉलेजी छात्राओं द्वारा यह प्रदर्शन किया जाता तो कोई बात नहीं। किन्तु सत्तादल की जिलाध्यक्ष की अगुवाई में भाजपाईयों की ओर से कॉलेज परिसर में पैदल मार्च कर परिसर के बाहर पुतला दहन करना सत्ता का दुरूपयोग करना है। 
*डूंगर कॉलेज में टायर जलाकर किया विरोध* 
राजकीय डूंगर महाविद्यालय में छात्र नेता राकेश गोदारा के नेतृत्व में टायर जलाकर महिला आरक्षण बिल के विरुद्ध वोट करने वाली पार्टियों कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया किया। गोदारा ने बताया कि महिला आरक्षण बिल पूरे देश में महिलाओं के अधिकारों और उनके सम्मान का प्रतीक था, यदि इन्हें पारित और अनुमोदित किया जाता तो इन विधेयकों के माध्यम से महिलाओं को 2029 के आम चुनावों से ही लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त हो सकता था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) का मुख्य लाभ लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना है, जिससे राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ती। यह कानून निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं को सशक्त बनाता, जमीनी स्तर पर नेतृत्व विकसित करेगा और 15 वर्षों के लिए लागू रहता परन्तु कुछ बड़ी पार्टियां महिलाओं को सम्मान अधिकारों का प्राप्त होना नहीं देखना चाहती। इन लोभी पार्टियों कांग्रेस और उनके गठबंधन समर्थित पार्टियां को आने वाले समय में देश की महिला शक्ति जरूर जवाब देगी। इस प्रदर्शन में भागीरथ गोदारा, अमित बिश्नोई, अतुल, रविन्द्र, श्रवण, सुमित, विष्णु, गौरी शंकर, सुदामा बिश्नोई, राहुल सहित सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित थे।

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