दीन हीन की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा: दिलीप ईसरानी

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): श्री श्याम धर्मार्थ सेवा संस्थान के तत्वावधान में 80 फिट रोड स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सामुदायिक भवन में संस्थान के अध्यक्ष दिलीप ईसरानी के जन्म दिवस पर विशाल नि:शुल्क मेडिकल एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ संत मनीष दास महाराज व संस्थान के अध्यक्ष दिलीप ईसरानी ने भगवान के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। संत मनीष दास महाराज ने ईसरानी को जन्म दिन की बधाई देते हुए कहा कि जन्म दिवस पर नि:शुल्क मेडिकल एवं रक्तदान शिविर का आयोजन कर मानव सेवा की मिशाल दी। यह आयोजन समाज को नई दिशा देने के लिए प्रेरणादाय है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्म दिवस पर एसे आयोजन करने चाहिए जिससे पात्र व्यक्तियों का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि रक्तदान सबसे बडा पुण्य है। रक्तदान करने से हजारों लोगों को जीवन मिलेगा ईसरानी ने रक्तवीरों का आह्वान करते हुए कहा कि परोपकार ही मानव का सबसे बडा धन है, इसलिए जीवन में सदैव परहित करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि दीन हीन की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। ईसरानी ने शीघ्र ही एक विशाल नेत्र चिकित्सा शिविर लगाने की घोषणा भी की। नितिन छाबड़ा ने बताया कि शिविर में अस्थि रोग व जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ ने 200, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ने 60, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने 600, बाल व शिशु रोग विशेषज्ञ ने 50 एवं अन्य रोग विशेषज्ञों ने करीब 150 लोगों की स्वास्थ्य जांच कर परामर्श दिया व निशुल्क दवाइयां वितरित की। उन्होंने बताया कि नेत्र रोग विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद 245 मरीजों को नि:शुल्क चश्मा वितरित किया। उन्होंने बताया कि शिविर में देश की सीमा पर खडे सैनिकों तथा थैलिसीमिया रोगियों के लिए 104 युवाओं ने स्वैच्छिक रक्तदान किया। सभी रक्तदाताओं को संस्थान की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान जयपुर पार्षद अंकित वर्मा, मोहित चंवरिया, जयनारायण कुमावत, वंशप्रदीप पारीक, अविनाश पारीक, राकेश खारोल, बुद्धराम मीणा, करण सिंह राजावत, वैद्य अरविंद शर्मा, कमल कुमार, राजू मालावत, संजय पारीक, जीतू विजय, संजय जैन, डॉ.सीताराम शर्मा, सुरेश राजवंशी, घनश्याम शर्मा, नरेश कसाणा, गिर्राज चौधरी, रामविलास बलाई, कमलेश पारीक, शशीकांत विजय, कैलाश नटवाड़ा व रामकेश मीणा सहित अन्य लोग व्यवस्थाओं में जुटे हुए थे।

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