झुंझुनूं जिले का धार्मिक पर्यटन के रूप में महत्व

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं जिला राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक केन्द्र है। यह जिला महान संतों, सिध्द पुरूषो व वाणी सिध्द संतो की तपोस्थली रही है। संतो की कड़ी में श्री चंचल नाथ जी, श्री अमृतनाथ जी, श्री नवानाथ जी महाराज, श्री श्रध्दा नाथ जी, खेतानाथ जी, शंकर दास जी, रामेश्वर दास जी, कूमनाथ जी, भानीनाथ जी, पुरूषोत्तम दास जी व वाणी सिध्द बिरला परिवार के वरदाता परमहंस बावलियां बाबा गणेश नारायण जी आदि की तपोभूमि रही है। यह जिला अपनी प्राचीन हवेलियों के साथ ही अनेक विश्व प्रसिद्ध मंदिरो व दरगाहों के लिए भी जाना जाता है। विश्व प्रसिद्ध रानी सती दादी मंदिर, जो भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। यह मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक अहम तीर्थ स्थल भी है।‌ इस मंदिर मे भादो अमावस्या के दिन मेला लगता है। लोहार्गल धाम जो अरावली की पहाड़ियों में स्थित है। इस धार्मिक स्थल का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है।‌ सूर्य मंदिर इस धाम का मुख्य आकर्षण का केन्द्र है। इस धार्मिक स्थल पर कृष्ण जन्माष्टमी से अमावस्या तक हजारों श्रद्धालु पद यात्रा करते हैं। साम्प्रदायिक सौहार्द की प्रतीक कमरुद्दीन शाह की दरगाह जो काना पहाड़ी पर स्थित है व नरहड में सूफी संत शकरबाह शाह की दरगाह, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं। इसके अलावा मनसा माता मंदिर, शाकम्बरी माता मन्दिर, महामाई मंदिर, सरस्वती मंदिर, खेमी सती मंदिर, बिहारी जी का मंदिर, पंचदेव मंदिर, लालेश्वर बालाजी मंदिर, सूरजगढ़ बाबा श्याम का मंदिर आदि अनेक स्थान, जो धार्मिक पर्यटन स्थल न केवल अध्यात्म से जुड़े हैं बल्कि यहां की पारम्परिक स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत भी पर्यटको को आकर्षित करती है।
इस जिले की भौगोलिक स्थिति, जो जयपुर से 150 किमी व दिल्ली से करीब 250 किमी की दूरी पर स्थित है। राजस्थान सरकार को चाहिए कि इस जिले को पर्यटन स्थल को लेकर घोषित करे व उपरोक्त धार्मिक स्थलों के लिए मूलभूत सुविधायें जैसे बिजली, पानी और सड़क बनवाने को लेकर गंभीरता से काम करे।

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