बीकानेर: मुक्ति संस्थान के तत्वावधान में रविवार को अजित फाउंडेशन सभागार में अशोक रंगा के आलेख संग्रह ‘कलम और यह परिवेश’ तथा महेंद्र रंगा के काव्य संग्रह ‘कह गया जो लौटेगा एक दिन’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सिद्धार्थ आचार्य थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र जोशी ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी, संपादक प्रो.(डॉ.) अजय जोशी तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक डॉ.हरि शंकर आचार्य विशिष्ट पहचान के रूप में मौजूद रहे। समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा दोनों पुस्तकों का विधिवत लोकार्पण किया। ‘कलम और यह परिवेश’ पर डॉ.हरिशंकर आचार्य तथा ‘कह गया जो लौटेगा एक दिन’ पर हरीश बी.शर्मा ने पत्रवाचन किए। अध्यक्षता कर रहे राजेंद्र जोशी ने कहा कि अशोक रंगा और महेंद्र रंगा की कृतियां संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने इन पुस्तकों को साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण योगदान बताया। उन्होंने कहा कि महेंद्र रंगा की कविताएं बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि हैं। वहीं अशोक रंगा के आलेख हमारे चारों ओर तैरते विषयों पर आधारित हैं। मुख्य अतिथि सिद्धार्थ आचार्य ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसी कृतियां वर्तमान परिवेश को समझने का सशक्त माध्यम बनती हैं। उन्होंने कहा कि लेखन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। विशिष्ट अतिथि मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि अच्छे साहित्य की पहचान उसकी समय के साथ प्रासंगिकता में होती है। उन्होंने कहा कि दोनों कृतियां पाठकों को चिंतन के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा महेंद्र रंगा की कविताओं में कैफियत हैं। अशोक रंगा के आलेख विषयों की वैविध्यता लिए है। डॉ.अजय जोशी ने कहा कि लेखन केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि इन पुस्तकों में समाज के विविध आयामों को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया गया है। डॉ.हरिशंकर आचार्य ने कहा कि ‘कलम और यह परिवेश’ समकालीन मुद्दों पर गहरी दृष्टि प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि यह संग्रह पाठकों को सोचने और समझने की नई दिशा देता है। हरीश बी. शर्मा ने कहा कि ‘कह गया जो लौटेगा एक दिन’ काव्य संग्रह भावनाओं की गहराई और जीवन के अनुभवों को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि यह कृति पाठकों के हृदय को छूने वाली है। गीतकार राजाराम स्वर्णकार ने स्वागत उद्बोधन दिया, मंच संचालन ज्योति प्रकाश रंगा ने किया। इस अवसर पर कमल रंगा, बुलाकी शर्मा, मनीष जोशी, मनोज व्यास, राकेश व्यास, सुलक्षणा दत्ता, विनोद आचार्य, कासिम बीकानेरी, गोविंद जोशी, संजय पुरोहित, संजय श्रीमाली, राजीव पुरोहित, गिरिराज पारीक, आत्माराम भाटी, वन्दना पुरोहित, मनमोहन जोशी, प्रवीण आचार्य, गिरिराज व्यास एवं मनीष आचार्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। डॉ.नमामी शंकर आचार्य ने आभार जताया।
बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि हैं महेंद्र रंगा की कविताएं
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April 06, 2026
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