भाजपा का नारा: सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास व सबका प्रयास कितना सार्थक

AYUSH ANTIMA
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भाजपा का मूलमंत्र है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास व सबका प्रयास कितना सार्थक है, ये मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के बयान से परिलक्षित होता है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने एक कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे यह नेगेटिव न फैलाएं कि काम नहीं हो रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर विधानसभा में 500 करोड़ या उससे अधिक रूपयों के विकास कार्य हुए हैं, इसलिए कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं के काम पर नजर रख रहा है। भजन लाल शर्मा ने कहा कि कार्यकर्ता सरकार की उपलब्धियो को जन जन तक पहुंचायें न कि काम न होने का प्रचार करें लेकिन शायद मुख्यमंत्री भूल गये कि हर कार्यकर्ता सत्ता का आनंद लेना चाहता है। यह देखा गया है कि पिछले ढाई साल के शासन में कुछ खास कार्यकर्ताओं को ही तवज्जो दी जा रही है। विदित हो भाजपा शासन में अफसरशाही हावी होने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी नाराज़गी सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर चुकी है। जब पूर्व मुख्यमंत्री व विधायकों के काम ही नहीं हो रहे तो आम कार्यकर्ता के काम की सोचना बेमानी होगा। अभी तक निगमों व बोर्डों को लेकर राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हो पाई है, इसको लेकर भी कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। यह भी देखा गया है कि सांसदों व विधायकों के इर्द-गिर्द वहीं चिर परिचित चेहरे नजर आते हैं, उसको लेकर भी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। देखा जाए तो अफसरशाही हावी होने का नजारा तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत के कार्यकाल में देखा गया था, जो सुपर सीएम की तरह काम कर रहे थे। संगठन की बात को लेकर दिया गया भजन लाल शर्मा का वह बयान कि संगठन हर कार्यकर्ता के काम पर नजर रखे हुए हैं विरोधाभासी है। संगठन पर भी उन्हीं कार्यकर्ताओं ने कब्जा कर रखा है, जो रसूखदार है। यदि गृह जिले झुंझुनूं के संगठन की बात करें तो जिलाध्यक्ष के कार्यक्रम में वही चिर परिचित चेहरे नजर आयेंगे व आयातित नेताओं को मंच पर जगह दी जाती है। जो भाजपा का मूल कार्यकर्ता हैं व भाजपा के सिध्दांतों व विचारधारा से बंधा हुआ है, उसको दरकिनार किया जाता है। जब जिला स्तर पर मूल विचारधारा वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की यह हालत है तो प्रदेश स्तर की बात करना खुली आंखों से सपने देखने जैसा है। भजन लाल शर्मा को सोचना होगा कि केवल विकास रूपी झुन्झुना कार्यकर्ताओं के हाथों में थमाने से कार्यकर्ताओं का असंतोष शांत नहीं होगा। भाजपा के मूल मंत्र में एक कारक है सबका प्रयास। जब उस कारक को गौण कर दिया जाए, जिसके बलबूते कोई भी राजनीतिक दल सत्ता के शिखर तक पहुंचता है तो यह उस दल के लिए सोचनीय विषय हो जाता है। जब एक मामूली अफसर भी भाजपा कार्यकर्ता का काम नहीं करता तो वह यही कहेगा कि भाजपा के राज में भी उनके काम नहीं हो रहे। यदि समय रहते इस असंतोष पर काबू नहीं पाया जाता है तो आगामी नगर निकाय व पंचायत चुनावों में यह असंतोष ज्वालामुखी बनकर फटेगा।

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