जल है तो कल है

AYUSH ANTIMA
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पीने का शुद्ध जल का संकट एक चुनौती बन गया है। आज के हालातों में आमजन को पीने का शुद्ध जल मिलना टेढी खीर है। कालांतर में हर गांव, कस्बे व शहर में भामाशाहों द्वारा परम्परागत जल स्रोतों का निर्माण व कुंए पानी की व्यवस्था करना उनकी पहली प्राथमिकता रही थी। आज वही जल स्रोत या तो रखरखाव की वजह से कुड़े के ढेर में तब्दील हो गये या फिर भुमाफियो ने उन पर कब्जा कर उनको नेस्तनाबूद कर निर्माण कर लिए हैं। देखा जाए तो ऐसा कोई गांव, कस्बा या शहर नहीं कि यह कुंए, बावड़ी या तालाब भूमाफियाओं के निशाने पर न रहे हों। जल स्रोतों को लेकर सरकार द्वारा गणना करवाई गई, जो काबिले तारीफ कदम कहा जा सकता है लेकिन महज यह कागजी खानापूर्ति बनकर न रह जाए, इसको लेकर सरकार को गंभीरता से सोचना होगा। लुप्त होते जल स्रोतों के रख रखाव व संरक्षण को लेकर सरकार व स्वयंसेवी संगठनों को ध्यान देने की जरूरत है। जल जीवन मिशन अभियान के तहत जल संरक्षण व शुध्दिकरण को लेकर करोड़ों रूपए फूंकने के बावजूद राजस्थान ने दूषित जल वाले राज्यों में अपना स्थान बरकरार रखा है। जल जीवन मिशन अभियान के तहत 52 लाख 67 हजार जलाशयों की जांच करने पर पाया गया कि सात लाख से ज्यादा जलाशयों का पानी आदमी की तो दूर की बात है, पशुओं के पीने योग्य ही नहीं है। इसकी एक खास वजह है भूमाफियाओं का अतिक्रमण। इस संकट को लेकर देश का उच्चतम न्यायालय इन अतिक्रमणों को हटवाने को लेकर सरकारों की ढिलाई के लिए बहुत तल्ख टिप्पणी कर चुका है। शेखावाटी की लाइफ लाइन काटली नदी के बहाव रास्ते पर भी भू-माफियों ने कब्जा कर लिया। झुंझुनूं के मंड्रेला कस्बे में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री व मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के आतिथ्य में एक बहुत बड़ा आयोजन हुआ। उसमें हर घर में पानी के संरक्षण के लिए टांके बनवाने पर जोर दिया गया। स्वयंसेवी संस्थाओं व भामाशाहों ने हजारो टांके बनवाने की घोषणा की थी लेकिन यह घोषणा ही रह गई, मूर्त रूप से यथार्थ के धरातल पर शून्य ही दिखाई देता है। अब सवाल यह उठता है कि एक दिन में तो यह जल स्रोत कचरे के ढेर में तब्दील नहीं हुए हैं। इसको लेकर सरकारों को ही दोषारोपण नहीं करना चाहिए, आमजन की भी जिम्मेदारी बनती है। आमजन को भी जागरूकता का परिचय देना होगा। यह देखा गया है कि जोहड़, तालाब, सार्वजनिक कुओं, बावड़ियों व गौचर भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर आमजन अपनी आंखें बंद कर तमाशबीन बन जाता है। सरकार इन अतिक्रमणों को लेकर उन भूमाफियाओं को नेताओं के निजी स्वार्थ के चलते अभयदान दिया जाता रहा है, जिससे इनके हौसले बुलंद हैं। जल है तो कल है, इस बात को भी आमजन को समझना होगा व जल संरक्षण को लेकर गंभीर प्रयास करने होंगे लेकिन इस मूलभूत सुविधा को लेकर सरकार भी अपने उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं हो सकती क्योंकि जब हमने विश्वगुरू बनने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं व मोदी के नेतृत्व में देश ने अंतरराष्ट्रीय मंचो पर असाधारण उपलब्धि हासिल की है और पानी जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर गंभीर नहीं है तो विश्वगुरू की बात करना बेमानी होगा। सरकार को सोचना होगा कि अशुध्द जल पीने से आमजन मे रोग पनप रहे हैं। अतः पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता पर सरकार चाहे केन्द्र की हो या राज्य की हो, अपने राज धर्म का पालन करते हुए जल जीवन मिशन अभियान को मूर्तरूप देते हुए हर गांव, ढाणी, कस्बा व शहर में पीने का शुद्ध जल पहुंचाने की दिशा में काम करें।

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