सड़को पर हादसो से होने वाली मौतों का मुख्य कारण मानवीय लापरवाही, कमजोर बुनियादी ढांचा और यातायात नियमों का पालन न करना है। इस समस्या को भारत के परिपेक्ष्य में देखे तो विशेष रूप से गंभीर स्थिति है, जहां हर दिन औसतन 480 लोगों की जाने इस सड़क हादसों में चली जाती है। निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाना, ओवरटेक सावधानी से न करना, लेन अनुशासन की परिपालना नहीं करना, गाड़ी चलाते समय मोबाइल का उपयोग, शराब के नशे में गाड़ी को चलाना। इसके साथ ही इन हादसों का एक मुख्य कारण सड़कों पर गड्ढे होना, डिवाइडर का सही से न होना और खराब रोशनी है। यदि झुंझुनूं-पिलानी राजमार्ग पर इन हादसो को देखें तो इनमें अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इस रूट पर अनियंत्रित गति से वाहनों के चलने व रूट पर ट्रेफिक दबाव होना ऐसे हादसो को न्यौता देता है। ट्रेफिक दबाव को देखते हुए इस मार्ग को चार लैन में परिवर्तित करने की अति आवश्यकता है। राज्य परिवहन विभाग की उदासीनता व अनदेखी भी इन हादसों का कारण है। चिड़ावा बाईपास के पिलानी रोड पर बने सर्किल व इसके बीच लगे तिराहों पर ट्रेफिक पुलिस का न होना भी ऐसे हादसों को होने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। यदि ऐसा होता है तो तेज रफ्तार से दौड़ रहे वाहनो पर नजर रखी जा सकती है और ऐसे वाहनों पर जुर्माना लगाना इन हादसों के न होने के कारण राहत भरा कदम कहा जायेगा।
अभी हाल ही में पिलानी बाईपास पर एक दुर्घटना में एक व्यक्ति को जान से हाथ धोना पड़ा। इस एक महीने में यह चौथी मौत है। स्थानीय प्रशासन की आंखें अभी भी बंद हैं कि इसको लेकर सड़क पर डिवाइडर लगाकर व स्पीड ब्रेकर का निर्माण करवाकर इस पर अंकुश लगाया जा सकता है। इसी क्रम में चिड़ावा झुंझुनूं रोड़ पर एक दर्दनाक हादसे की खबर सुनने को मिल रही है।
पिलानी-झुंझुनूं राजमार्ग NH-709 Ext पर लगातार हो रहे हादसों और जर्जर स्थिति को देखते हुए, राजस्थान सरकार ने इसे दुरुस्त करने के लिए फोरलेन निर्माण की बड़ी योजना स्वीकृत की है। इस सड़क पर जल भराव और खराब गुणवत्ता के कारण अक्सर ऐसे हादसे होते हैं। इसके साथ ही इस बजट में राजस्थान सरकार ने इस बजट में भी 16 किमी इस सड़क को फोरलेन में परिवर्तित करने के लिए 48 करोड़ रूपये आवंटित किए हैं लेकिन इसको लेकर सरकार को इन सड़कों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर रहना होगा। यह सड़क हादसे किसी मां की गोद सूनी करते है, किसी सुहागिन का सिंदूर पौंछ देने के साथ ही बच्चों के सिर से साया उठ जाता है। आक्रोशित जनमानस एक दिन सड़क जाम कर अपने कर्तव्य की इति कर लेते हैं। यह हमारा भी कर्तव्य बनता है कि निर्धारित गति सीमा के अंदर गाड़ी चलाने के साथ ही ट्रेफिक के नियमों का पालन करें।