राजस्थान के विप्र समाज को एक जाजम पर लाने को लेकर हमेशा प्रयासरत रहने वाले, हर कौम की लड़ाई के लिए अपना जीवन खपाने वाले विप्र शिरोमणि पंडित भंवर लाल शर्मा चुरु जिले के सरदार शहर विधानसभा से सात बार विधायक रहे। विप्र समाज को विधाधर नगर, जयपुर में परशुराम भवन के निर्माण में उनका बहुमूल्य योगदान था। राजस्थान गौड़ ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष रहे पंडित भंवरलाल शर्मा ने सदैव विप्र हितों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने विप्र समाज के हितों को बलि चढ़ाकर राजनीति नहीं की, जैसा की आजकल विप्र समाज के नेता राजनीति कर रहे हैं। एक बार विधायक बनने के बाद उनको समाज में बदबू आने लग जाती है और समाज के किसी आयोजन में अतिथि बनना भी अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। इसके विपरीत पंडित जी विप्र समाज के ऐसे वट वृक्ष थे, जिनके दरवाजे से कोई खाली हाथ नही लौटता था। उसी का परिणाम था कि उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल से चुनाव लड़ा हो, भारी मतों से विजयी हुए। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सात बार विधायक चुने गये। पंडित जी ने सत्ता के बल पर दलाली करने वालों को बेनकाब किया था। सरदारशहर क्षेत्र के गांव जैतसीसर गांव में पंडित सेवाराम के घर जन्म लिया था। सन् 1965 से लगातार बीस साल तक गांव के सरपंच रहे। सरपंची के अपने कार्यकाल में अनगिनत जनोपयोगी कार्य करवाए। उनके जनसंपर्क की मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गांव के हर व्यक्ति को नाम से जानते थे। राजनीतिक जीवन में बार बार दल बदलने को लेकर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जनता की सेवा से बड़ा कोई भी राजनीतिक दल नहीं है। उनकी स्वीकार्यता इसी बात से सिद्ध होती है कि कांग्रेस, जनता दल, भाजपा जैसे दलों के चुनाव चिन्हों पर चुनाव जीतते रहे। पंडित भंवर लाल शर्मा की लोकप्रियता को लेकर यही कहा जा सकता है कि उपचुनाव में भैरोसिंह शेखावत सरकार ने मंत्रियों की फौज उतार दी थी, उसके बावजूद भारी मतों से विजयी हुये थे। विप्र समाज में जो आज बिखराव दिख रहा है और अपनी निजी महत्वाकांक्षा समाज का उपयोग कर समाज को दरकिनार कर देते हैं, उनको पंडित भंवर लाल शर्मा के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए कि समाज को हमने क्या दिया है। पंडित भंवर लाल शर्मा समाज के प्रति समर्पित थे, उनकी सदैव यह सोच रही थी कि "यह मत सोचो कि समाज ने हमें क्या दिया लेकिन इस सोच के साथ समाज सेवा करो कि हम समाज को क्या दे रहे हैं।" पंडित भंवर लाल शर्मा ने कभी किसी राजनेता की बैसाखी का सहारा नहीं लिया, उनकी लोकप्रियता ही उनकी बैसाखी रही थी। आज विप्र समाज के पंडित भजन लाल शर्मा प्रदेश की कमान संभाल रहे हैं लेकिन यह विप्र समाज का दुर्भाग्य है कि अभी तक विप्र कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन नहीं हो पाया है। विप्र कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की निष्क्रियता इस बात को प्रदर्शित करती है कि वे विप्र समाज के हितों के प्रति कितने संवेदनशील है। विप्र समाज के आधुनिक नेताओं के लिए पंडित भंवर लाल शर्मा एक नजीर है, जिन्होंने राजनीतिक स्वार्थों और कुर्सी से उपर समाज हित को रखा। राजस्थान में करीब सभी जातियों के कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन हो चुका है, आखिर क्या मुख्यमंत्री को विप्र कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन के लिए पर्ची का इंतजार तो नहीं।
*विप्र समाज शिरोमणि पंडित भंवर लाल शर्मा को आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) परिवार की ओर से श्रध्दापूर्ण श्रद्धांजलि*