बीकाजी के सीएमडी शिवरतन अग्रवाल का शरीर पंचतत्व में विलीन

AYUSH ANTIMA
By -
0



बीकानेर: बीकाजी के सीएमडी शिवरतन अग्रवाल का शरीर पंचतत्व में विलिन हो गया, उनको मुखाग्नि बेटे दीपक अग्रवाल ने दी। उनकी अंतिम यात्रा में शहर के गणमान्यजनों के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग शामिल हुए। इससे पहले उनकी अंतिम यात्रा सार्दुलगंज स्थित आवास से नत्थूसर गेट बाहर स्थित अग्रवाल समाज के श्मशान गृह हांडी कुंडी पहुंची। रास्ते भर उनके पार्थिव शरीर पर शहरवासियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी। बता दे कि बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल के सीएमडी और प्रख्यात उद्योगपति शिवरतन अग्रवाल (74) का गुरूवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर निजी विमान से देर रात बीकानेर पहुंचा। उनके साथ परिवार के सदस्य भी 4 अलग-अलग चार्टर विमानों से पहुंचे।
*ये रहे अंतिम यात्रा में शामिल*
सुबह से ही उनके सार्दुलगंज स्थित आवास पर अंतिम दर्शनों के लिए भारी भीड़ उमड़ी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान रहे मगन सिंह राजवी, भाजपा नेता देवी सिंह भाटी, पूर्व मंत्री बीडी कल्ला, गोविन्द राम मेघवाल, भंवर सिंह भाटी, महेन्द्र गहलोत, गहलोत के बेटे वैभव गहलोत, महावीर रांका सहित तमाम लोगों ने शिवरतन अग्रवाल को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल, पूर्व महापौर मकसूद अहमद, व्यापार मंडल अध्यक्ष जुगल राठी, कन्हैया लाल बोथरा, हनुमान अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, यशपाल गहलोत, साजिद सुलेमानी, डॉ.सत्यप्रकाश आचार्य, रविशेखर मेघवाल, एड.अशोक प्रजापत, दीपक पारीक, शशि शर्मा, नवल पुरोहित, हीरालाल हर्ष सहित अनेक गणमान्यजनों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर फन्ना बाबू को अंतिम विदाई दी। 
*बड़ी पहचान छोड़ गए फन्ना बाबू*
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश विदेश में राव बीका के नाम से बीकाजी ग्रुप बनाने वाले शिवरतन अग्रवाल रिश्ते निभाने वाले थे। वह काफी लोकप्रिय थे। जब वे गोठ करते तो अपने दोस्तों को बुला लेते थे। वे अपने पीछे एक बड़ी पहचान छोड़कर गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा पढ़ाई की मोहताज नहीं होती हैं। वे आठवीं पास थे। इसके बाद भी उन्होंने अपने ब्रांड को देश-विदेश में पहचान दी। ये युवाओं के लिये प्रेरणा की बात है। गहलोत ने कहा कि हमेशा जमीन से जुड़े रहे। मशीनी युग में भी वे अपने श्रमिकों का पूरा ख्याल रखते थे। वे अच्छे खिलाड़ी थे। व्यापार मंडल के अध्यक्ष रहे। वे बहुमुखी प्रतिभा की धनी थे।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!