आरजीएचएस स्कीम बनी सरकारी कर्मचारियों के जी का जंजाल

AYUSH ANTIMA
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राजस्थान मे सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर्स को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली महत्वाकांक्षी आरजीएचएस स्कीम अब उनके जी का जंजाल बन चुकी है। इस योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों के 18000 से 33500 मूल वेतन तक 265 रुपये हर महीने, 33501 से 54000 मूल वेतन पर 658 रुपये प्रति माह व 54000 से अधिक मूल वेतन पर 875 रुपये प्रतिमाह प्रिमियम काटा जाता है, चाहे वह इस योजना का लाभ ले या न ले। वर्तमान में स्थितियों के अनुसार इस योजना से जुड़े लाभार्थी इलाज व दवाओं को लेकर परेशान हैं। निजी अस्पतालों और दवा की दुकानों के करीब दस महीने से अधिक का करीब 600 करोड़ का भुगतान बकाया है, जिसके कारण 750 से अधिक निजी अस्पतालों ने कैशलैस इलाज व दवाईयां देने से मना कर दिया है। निजी अस्पतालों को बकाया भुगतान न मिलने से ईलाज करना बंद कर दिया है, जिससे मरीज दर दर भटक रहे हैं या अपने खर्चे पर इलाज करवा रहे हैं। इस योजना के दूसरे पहलू को देखे तो निजी अस्पतालों व दवा विक्रेताओं द्वारा फर्जीवाड़े की खबरें आती रही है। फर्जीवाड़े को लेकर इस घोटाले में लिप्त 64 से अधिक कर्मचारियों/डाक्टरों को सस्पेंड किया जा चुका है। 19 पर एफआईआर दर्ज की गई है और 8 अस्पतालों को आरजीएचएस नेटवर्क से बाहर कर दिया है। अभी हाल ही में आरजीएचएस में फर्जीवाड़े को लेकर जयपुर के एक निजी अस्पताल के संचालक की गिरफ्तारी की गई। सूत्रों की मानें तो जांच में सामने आया कि अस्पताल द्वारा आरजीएचएस पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड किए गये थे। एक ही मरीज को बार बार डिस्चार्ज दिखाकर दोबारा भर्ती करना और सहमति फार्म में तारीखें बदलकर सरकारी योजना का पैसा गलत तरीके से क्लेम करने का आरोप है। इस गिरफ्तारी के विरोध में निजी अस्पतालों के संघों व डाक्टरों के संगठनों ने आरजीएचएस स्कीम के तहत सेवाएं बंद करने की घोषणा की व 24 घंटे के लिए निजी अस्पतालों ने ओपीडी, आईपीडी और आपातकालीन सेवाएं बंद रखी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का आरोप है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच के दौरान अनियमितताए नहीं पाए जाने के बावजूद डाक्टर की गिरफ्तारी को लेकर चिकित्सको में रोष है। अब सवाल उठता है कि जब सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर्स के वेतन से हर महीने कटौती होती है तो सरकार ने भुगतान क्यों नहीं किया। कुछ निजी अस्पतालों व मेडिकल स्टोर्स के द्वारा किये गये फर्जीवाड़े की सजा ईमानदारी से ईलाज करने वाले अस्पतालों को आखिर क्यों दी जा रही है। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार को चाहिए कि इसमें पारदर्शिता लाने का काम करें, जिससे सरकारी कर्मचारियों खासकर बुजुर्ग पेंशनर्स को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

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