जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): अंबेडकर जयंती के पावन अवसर पर, वार्ड संख्या 134 के पार्षद पंडित करण शर्मा ने निजी स्कूलों द्वारा संस्थान खुला रखने और बाबा साहेब के योगदान को नजरअंदाज करने पर कड़ा रोष प्रकट किया। पार्षद शर्मा ने इसे शिक्षा के मंदिर में संवैधानिक मूल्यों की हत्या करार दिया।
*संविधान निर्माता का अपमान असहनीय*
प्रेस को संबोधित करते हुए पंडित करण शर्मा ने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस महामानव ने हमें शिक्षा का अधिकार दिया और जिसकी बदौलत आज ये शिक्षण संस्थान चल रहे हैं, उन्हीं के जन्मोत्सव पर कुछ निजी स्कूल अपनी व्यापारिक मानसिकता का परिचय दे रहे हैं। आज स्कूल खोलकर इन संस्थानों ने यह स्पष्ट संदेश (जनादेश) दिया है कि उन्हें बाबा साहेब की विचारधारा और सिद्धांतों से कोई सरोकार नहीं है।"
*विपक्ष और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल*
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष और स्कूल प्रबंधन की यह मिली भगत समाज में एक गलत संदेश भेज रही है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माताओं के प्रति सम्मान सिखाना भी है। अंबेडकर जयंती पर अवकाश न रखना और कोई समारोह आयोजित न करना करोड़ों देशवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
*शांतिपूर्ण विरोध और चेतावनी*
पंडित करण शर्मा ने स्पष्ट किया कि वे कानून को हाथ में लेने के बजाय संवैधानिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से मांग की है कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो राष्ट्रीय पर्वों और महापुरुषों की जयंती की गरिमा का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्कूल प्रबंधन ने अपनी इस मानसिकता में सुधार नहीं किया, तो आगामी दिनों में जन-आंदोलन छेड़कर जनता के बीच इन संस्थानों की पोल खोली जाएगी।इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे।