अवैध अतिक्रमण पर सरकार कितनी गंभीर

AYUSH ANTIMA
By -
0


गोचर भूमि, मंदिर माफी भूमि व राजस्व भूमि पत्र अतिक्रमण एक गंभीर मुद्दा है, जो शहरीकरण, राजनीतिक संरक्षण व प्रशासनिक लापरवाही के कारण नासूर बन चुका है। यह मुद्दा न केवल सरकारी भूमि, गोचर भूमि या मंदिर माफी की भूमि पर अवैध कब्जा है बल्कि सामाजिक संघर्ष व अवैध कालोनियों के पनपने का मुख्य कारण भी है, जिससे विकास कार्य बाधित होते हैं। इस समस्या की मूल जड़ बढ़ती आबादी, भ्रष्टाचार, भू-माफियों को राजनीतिक संरक्षण व प्रशासनिक संरक्षण है। अवैध अतिक्रमण को लेकर राजस्थान मे राजस्व विभाग की धारा 91 के तहत अवैध अतिक्रमण को हटाने व दोबारा कब्जा करने को लेकर सजा का प्रावधान है। अवैध अतिक्रमण को लेकर अक्सर राजनीतिक संरक्षण पक्षपात के आरोप लगते हैं, जिससे वह संवेदनशील मुद्दे का रूप ले लेता है। गोचर भूमि (चारागाह) जो गौवंश की एक जीवन रेखा के रूप में अपनी पहचान रखती है, उस जमीन पर अतिक्रमण कर खेती, कुंए या निर्माण कर अवैध कब्जों के मामले देखे गये है। झुन्झुनू जिला भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के सरकारी भूमि व गोचर भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर सख्त रूख अपनाया है। सरकार ने अब सरकारी भूमि व गोचर भूमि पर कब्जा करने वालों के नाम और फोटो गांव गांव व सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टरों के माध्यम से सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर विशेष जोर दिया है। इसके साथ ही अवैध अतिक्रमणों के पीछे की विभागीय मिलीभगत की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं। पंचायती राज विभाग ने राज्य में करीब 200 चिन्हित बड़े अतिक्रमणकारियों को नोटिस थमाया है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर ग्रामीण क्षेत्रों में चारागाह भूमि व सरकारी भूमि को मुक्त करवाने का महाभियान चलाया है। उपरोक्त निर्णय यदि जमीनी स्तर पर हकीकत बनकर आता है तो भजन लाल शर्मा सरकार का सराहनीय क़दम कहा जायेगा। 
सरकार के इस फैसले के दूसरे पहलू पर नजर डालें तो क्या यह अतिक्रमण सफेदपोश के संरक्षण व नौकरशाही की मिलीभगत बिना संभव है। यदि नहीं तो क्या सरकार उन अफसरों के नाम व फोटो सार्वजनिक स्थानों पर लगायेगी, जिनके हस्ताक्षरों से कागज बने हैं और उस भूमि पर कब्जा या निर्माण हुआ है। सरपंच व नगर निकाय अध्यक्ष व स्थानीय प्रशासन अपने निजी हितों को पूरा करते हुए पट्टे जारी कर देते हैं लेकिन जब मामला माननीय न्यायालय की जद में आता है तो उस पर बुलडोजर चलवा दिया जाता है। देखा जाए तो अवैध अतिक्रमण एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, जिसको लेकर सरकार को हर पहलू को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!