विश्व महिला दिवस विशेष: मूंग बेचकर पढ़ाया, बेटी बनी अध्यापिका, फिर थानेदार और अब RAS

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): पश्चिमी राजस्थान के एक सामान्य किसान परिवार से निकलकर संघर्ष, सेवा और संकल्प की मिसाल बनी पुलिस सब-इंस्पेक्टर उमा व्यास ने अब राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में चयन हासिल कर नया इतिहास रच दिया है। खेतों की उपज बेचकर बेटी की पढ़ाई पूरी कराने वाले पिता के सपनों को साकार करते हुए उमा पहले सरकारी अध्यापिका बनीं, फिर राजस्थान पुलिस में उप निरीक्षक (SI) के रूप में चयनित हुईं और अब प्रशासनिक सेवा तक पहुंचकर समाज की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उमा व्यास न केवल प्रशासनिक सेवा में चयन के कारण चर्चा में हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। श्री कल्पतरु संस्थान की वालंटियर के रूप में वे अब तक 22 हजार से अधिक पौधे लगाकर उनका संरक्षण कर चुकी हैं। उमा व्यास प्रसिद्ध पर्यावरणविद् विष्णु लाम्बा को अपना आदर्श मानती हैं। उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने श्री कल्पतरु संस्थान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। उमा की पर्यावरणीय पहलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के पूर्व प्रमुख एरिक सोलहेम ने वीडियो संदेश जारी कर उनके प्रयासों की प्रशंसा की है। 

*किसान परिवार से निकलकर बनाया संघर्ष का इतिहास*
उमा व्यास एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। बचपन में आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया। कड़ी मेहनत के बल पर वे पहले राजकीय अध्यापिका बनीं और बाद में राजस्थान पुलिस में उप निरीक्षक के पद पर चयनित हुईं। उमा सहित उनकी तीन बहनें भी पुलिस सेवा में हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए एक मिसाल है। श्री कल्पतरु संस्थान ने उमा व्यास को अपने ग्रीन लंग्स अभियान का ब्रांड एंबेसडर और कोऑर्डिनेटर बनाया है। इस अभियान के तहत भारत की प्राचीन पौधारोपण तकनीकों के आधार पर बड़े-बड़े जंगल तैयार किए जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में अब तक हजारों पौधे लगाए और संरक्षित किए जा चुके हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी इस अभियान से जुड़ चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व
इंडो-नेपाल ग्रीन मिशन के तहत उमा व्यास काठमांडू पहुंचीं और वहां पर्यावरण संरक्षण को लेकर नेपाल सरकार के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उनके प्रयासों से प्रभावित होकर नेपाल के वन मंत्री ने पूरे देश में पौधारोपण के लिए निशुल्क पौधे उपलब्ध कराने की घोषणा की। *महिलाओं और बच्चों के लिए भी अभियान*
उमा व्यास श्री कल्पतरु संस्थान की महिला शाखा के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी काम कर रही हैं। उनकी पहल पर “ग्रीन बचपन अभियान” शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य दुनिया के सबसे छोटे बच्चों की सबसे बड़ी ग्रीन आर्मी तैयार करना है। इसके अलावा उन्होंने कचरा दो – पौधा लो अभियान, जयपुर शेयरिंग फेस्टिवल, क्लीन बीच अभियान जैसी कई सामाजिक पहलें भी चलाई हैं। उमा व्यास को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। जिसमें वृक्ष मित्र पुरस्कार, वन विभाग राजस्थान का प्रशंसा पत्र, कालिदास अकादमी उज्जैन द्वारा सम्मान, राजस्थान के राज्यपालों और कई मंत्रियों द्वारा सम्मान लेकिन उमा कहती हैं कि पुरस्कार उनका लक्ष्य नहीं हैं—“मेरे लिए असली पुरस्कार प्रकृति और समाज की सेवा है।” उमा की सफलता के पीछे उनके पिता का संघर्ष भी एक बड़ी प्रेरणा है। कभी खेत की मूंग बेचकर बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाने वाले पिता की मेहनत आज रंग लाई है। उमा व्यास का जीवन संदेश देता है कि संघर्ष से निकली बेटियां न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और प्रकृति दोनों का भविष्य बदल सकती हैं। विश्व महिला दिवस के अवसर पर उमा व्यास कहती हैं—“अगर बेटियों को अवसर और विश्वास मिले तो वे समाज, पर्यावरण और देश के विकास में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।”

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