भक्ति और भाव के साथ संपन्न हुई श्रीमद्भागवत कथा: सुदामा चरित्र के प्रसंग पर भावुक हुए श्रद्धालु

AYUSH ANTIMA
By -
0


झुंझुनू (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): शहर के मुकुंद सेवा सदन में पिछले सात दिनों से बह रही भक्ति की अविरल धारा को शनिवार सायं विश्राम दिया गया। खंडेलिया परिवार द्वारा आयोजित इस श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन संत श्री हरिशरण जी महाराज ने सुदामा चरित्र का मर्मस्पर्शी वर्णन किया, जिसे सुनकर पाण्डाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

*सुदामा चरित्र: मित्रता और श्रद्धा की अनूठी मिसाल*

कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने विस्तार से व्याख्या करते हुए बताया कि सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच और अमीरी-गरीबी का कोई स्थान नहीं होता। भगवान कृष्ण ने न केवल सुदामा का मान रखा, बल्कि बिना मांगे ही उन्हें लोक-परलोक की संपदा सौंप दी। महाराज श्री ने जोर दिया कि ईश्वर केवल प्रेम और निस्वार्थ भक्ति के भूखे हैं।

*फूलों की होली और भव्य स्वागत*

कथा के समापन पर मुकुंद सेवा सदन का सभागार 'नंद के आनंद भयो' और 'जय श्री कृष्णा' के जयकारों से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने फूलों की होली खेलकर उत्सव मनाया। इस विशेष अवसर पर श्री श्याम आशीर्वाद सेवा संस्था की ओर से संत श्री हरिशरण जी महाराज का भव्य अभिनंदन किया गया। संस्था के ट्रस्टी डॉ.डीएन तुलस्यान, श्रवण केजडीवाल, सीए पवन केडिया, और उपस्थित एडवोकेट रवि मारोलिया सहित आयोजक प्रमोद खंडेलिया ने महाराज श्री को साॅफा और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया। माल्यार्पण एवं शॉल ओढ़ाकर आभार व्यक्त किया। बाबा श्याम का प्रतीक चिह्न भेंट स्वरूप प्रदान किया।

*हवन-यज्ञ और भंडारा*

कथा की पूर्णाहूति से पूर्व खंडेलिया परिवार द्वारा हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व शांति और जन-कल्याण की कामना की गई। कथा विश्राम के पश्चात विशाल भंडारा (प्रसाद) आयोजित हुआ, जिसमें शहर के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!