निवाई (लालचंद माली): निवाई नगर पालिका क्षेत्र में विकास के नाम पर सरकारी धन की लूट और नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे कार्यों का एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एक विभागीय अधिकारी ने बेबाक होकर सिस्टम की पोल खोलते हुए स्वीकार किया है कि शहर में होने वाले अधिकांश कार्य प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कथित 'सांठगांठ' से संचालित हो रहे हैं।
*करोड़ों का चूना: चरागाह और कृषि भूमि पर अवैध कब्जे*
लीगल सूत्रों और जमीनी पड़ताल में सामने आया है कि निवाई शहर में सरकारी जमीनों पर अवैध अतिक्रमण और कृषि भूमि पर बिना कन्वर्जन (रूपांतरण) के बसाई जा रही कॉलोनियों का जाल बिछ चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन अवैध कॉलोनियों में सरकारी खर्च पर सड़कें और रोड लाइटें लगाई जा रही हैं।नियमों के विरुद्ध विद्युत और पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राजस्व विभाग और नगर पालिका प्रशासन की चुप्पी के चलते भू-माफिया सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगा रहे हैं।
*5 सौ के 'शपथ पत्र' का खेल*
मामले में सबसे गंभीर मोड़ तब आया, जब विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। विभागीय अधिकारी के अनुसार, पहले नगर पालिका ईओ और पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर कनेक्शन दिए जाते थे लेकिन बाद में नियमों को ताक पर रखकर महज 5 सौ रुपये के स्टाम्प पर (क्षतिपूर्ति बांड) पर चरागाह जमीनों और अवैध निर्माणों में भी धड़ल्ले से कनेक्शन दिए जाने लगे है।
*अधिकारी का बयान:*
"शहर हो या गांव, उपभोग करने पर कनेक्शन दिए जा सकते हैं। पिछले कुछ समय से 500 रुपये के शपथ पत्र पर चरागाह में भी कनेक्शन दिए गए, लेकिन अब पिछले 6 महीनों से बिना लीगल दस्तावेजों के कनेक्शन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।"
*केसी माली*
सहायक अभियंता प्रथम जेवीएनएल निवाई, टोंक।
*जांच की आंच से भू-माफियाओं में हड़कंप*
जैसे ही चरागाह जमीनों पर हुए अतिक्रमण और वहां दी गई सरकारी सुविधाओं (बिजली-पानी-सड़क) पर जांच एजेंसियों की नजर पड़ी है, शहर के रसूखदार कॉलोनाइजरों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है। करोड़ों रुपये कमाने वाले इन सफेदपोशों के अब 'घुटने टिकते' नजर आ रहे हैं।
*बड़ा सवाल:* क्या प्रशासन इन अवैध कॉलोनियों में बने निर्माणों को ध्वस्त कर मूल स्वरूप बहाल करेगा या फिर रसूखदारों के दबाव में यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा ?
*सारा खेल वोटो के लिए*
सरकारी चरागाह जमीनो पर अवैध कॉलोनियां बसाकर भोले भाले लोगों को सभी मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली-पानी, रोड़ लाईटे, सड़के और अब मतदाता सूचियों में फर्जी तरीके से नाम जोड़कर उन्हें लीगल बनाना सब कुछ आगामी निकाय चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को ज्यादा से ज्यादा वोट मिले, इसलिए सारे हथकंडे किए जा रहे है।
*जबरदत खलबली*
सरकार के स्तर पर जिला कलेक्टर और एसडीएम लेवल पर विभिन्न सरकारी विभागों से जांचे करवाई जा रही है। जांच करने वाले विभागों और अधिकारियो को अति गोपनीय रखा जा रहा है। नगर पालिका, तहसील, विद्युत विभाग में जबरदत खलबली मची हुई है।