भाजपा का झुंझुनू जिला, प्रदेश एससी मोर्चा की कार्यकारिणी में खाली हाथ

AYUSH ANTIMA
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भाजपा प्रदेश एससी मोर्चा अध्यक्ष निहाल चंद ने अपनी टीम की घोषणा की, जिसको लेकर गृह जिले झुनझूनू की भागीदारी को लेकर प्रदेश कार्यकारिणी का पोस्टमार्टम जरूरी हो जाता है। यदि संगठन की बात करें तो नवनियुक्त भाजपा अध्यक्ष की घोषणा से ही भाजपा में विरोध के स्वर देखने को मिले थे, जिसके चलते भाजपा प्रदेश प्रवक्ता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष ने भी शायद इस गुटबाजी की आहट को नहीं सुना और आयातित नेताओं के साथ मंच साझा करती नजर आ रही है। यही गुटबाजी का आलम है कि अभी घोषित एससी मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी में झुंझुनूं का नाम नदारद है। विदित हो पिलानी विधानसभा आरक्षित सीट है, जो पिछले दो विधानसभा चुनावों में हार का सामना कर रही है। इस सीट पर भाजपा के एससी के नेता स्वर्गीय काका सुंदरलाल का वर्चस्व रहा है। यदि प्रदेश कार्यसमिति में दावेदारी को लेकर देखे तो चिड़ावा पूर्व प्रधान व काका सुंदरलाल के पुत्र व पिलानी विधानसभा प्रत्याशी व पूर्व जिला महामंत्री का नाम प्रमुखता से आता है। पूर्व विधायक जेपी चंदेलिया, जिन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली, उनकी दावेदारी को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। इस नवीनतम कार्यकारिणी की घोषणा से असंतोष के स्वर निश्चय ही उभर रहे हैं। पिलानी विधानसभा के पिछले दो चुनावों में कांग्रेस की जीत को लेकर यही कहा जा सकता है कि यह वोट बैंक कांग्रेस की तरफ घिसकर उसकी जीत सुनिश्चित कर रहा है। अब प्रदेश कार्यकारिणी में जिले की अनदेखी करना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है, वैसे भी पिछले चुनावों में भाजपा की स्थिति कुल मिलाकर अच्छी नहीं कही जा सकती क्योंकि इस जिले मे भाजपा की हार का कारण कांग्रेस नहीं बल्कि भाजपा ही है। प्रदेश कार्यसमिति में जिले के किसी नेता का नाम न आना झुन्झुनू जिला गुटबाजी के भंवर में फंसा हुआ है, उसमें इस लिस्ट ने इस गुटबाजी की आग में घी का काम किया है। जिले में भाजपा नेता फोटो सैशन की बीमारी से बाहर नहीं निकल पाए हैं। जिले के स्थानीय नेताओं ने जयपुर मे अपने अपने आका पकड़ रखे हैं व उनके साथ फोटो डालकर गुटबाजी की इतीश्री करते नजर आ रहे हैं और जिलाध्यक्ष कातर नजरों से उनके कारनामे देख रही है। वैसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ही पंचायत और निकाय चुनावों में इस गुटबाजी का दंगल देखने को मिलेगा लेकिन भाजपा एससी मोर्चा में झुंझुनूं की भागीदारी न होना इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेगे क्योंकि यह प्रश्न भविष्य की गर्त में छिपा है।

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