निवाई (लालचंद माली): माफियाओं द्वारा खुलेआम चरागाह भूमि पर प्लाॅट काटकर बेचने का मामला तहसील प्रशासन की कार्य शैली के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। शहर में चरागाह माफियाओं द्वारा जिस बेखौफ अंदाज में चरागाह भूमि पर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, वह सीधे तौर पर तहसील प्रशासन की व्यवस्था को ठेंगा दिखाना है। क्या तहसीलदार नरेश कुमार इन रसूखदार चरागाह माफियाओं पर शिकंजा कसने की हिम्मत दिखा पाएंगे या फिर पैसे और पहुंच के आगे कानून के हाथ बौने साबित होंगे। शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या तहसील प्रशासन द्वारा चरागाह माफियाओं को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। तहसील प्रशासन की अब तक की चुप्पी यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या प्रशासन ने इन सफेदपोश चरागाह माफियाओं के सामने घुटने टेक दिए हैं। शहर की जनता अब उपखंड अधिकारी साहब से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है ताकि यह संदेश जा सके कि शहर में राज सिर्फ और सिर्फ कानून का है, किसी भी तरह से चरागाह माफियाओं का नहीं।
*इन चरागाह खसरों का है मामला*
696/1 (170 बीघा), 825/1 (41 बीघा), 3130 (59 बीघा), 3389 (16 बीघा), 57 14/3502 (7 बीघा), 4584/1 (3 बीघा), 5660/4615 (3 बीघा), 4178 (1 बीघा), 4624/1(5 बीघा), 4467/1 (9 बीघा), 4584/1 (2 बीघा)