महिला आयोग की गरिमा पर उठते सवाल*

AYUSH ANTIMA
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राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार की एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना 31 जनवरी 1992 को महिला अधिकारों के संरक्षण, उत्पीड़न रोकने व महिला सशक्तिकरण को लेकर की गई थी। यह आयोग दहेज, कार्य स्थल व अन्य स्थानों पर यौन उत्पीडन जैसे मामलों मे संज्ञान लेकर उन्हें त्वरित न्याय दिलाने में अहम भूमिका अदा करता है। इसी तर्ज पर राज्य महिला आयोग का गठन भी इन्हीं बातों को लेकर किया गया कि महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण हो सके। एक कहावत है कि जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो उसे ईश्वर भी नहीं बचा सकता है। महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर ने एक आरोपी कथित ज्योतिषि बाबा अशोक खरात उर्फ कैप्टन के संबंधों के आरोप में सोशल मीडिया पर विडियो वायरल होने से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। एक कथित विडियो में राज्य महिला आयोग अध्यक्ष नासिक के ढोंगी बाबा अशोक खरात के पैर धोती और तांत्रिक अनुष्ठान में शामिल होती नजर आ रही थी। अशोक खरात पर 58 से ज्यादा महिलाओं के यौन शोषण और आपत्तिजनक विडियो बनाने के गंभीर आरोप है और वह पुलिस की गिरफ्त में हैं। महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तिकरण की जिम्मेदारी के रूप में महिला आयोग काम करता है लेकिन महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग अध्यक्ष का वह आचरण, जो वायरल विडियो में दिखाया गया है, इस पद की गरिमा को गिराने वाला है। रूपाली चाकणकर के इस आचरण को लेकर विपक्ष हमलावर था, इसको देखते हुए उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आरोपी कथित ज्योतिषि व तान्त्रिक अशोक खरात को नासिक में गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान पुलिस को 58 विडियो मिले है, जिनमें कुछ आपत्तिजनक क्लिप भी शामिल हैं। आरोपी ने राजनीतिक व सामाजिक संपर्कों का इस्तेमाल कर महिलाओं का भरोसा जीता और फिर धार्मिक या आध्यात्मिक अनुष्ठानों के नाम पर उनका यौन शोषण किया। 
उपरोक्त प्रकरण को यदि मानवीय व राजनीतिक दृष्टि से देखें तो महिलाओं के अधिकारों को लेकर न्याय दिलाने वाली संस्था की प्रमुख का नाम ऐसे ऐसे आरोपी से जुड़ना, जिस पर यौन उत्पीडन के गंभीर आरोप लगे हैं, इस पद की गरिमा गिराने वाला कृत्य है। यदि इसको सामाजिक व धार्मिक दृष्टि से देखें तो लोगों की हस्तरेखा देखकर उनके भाग्य के बारे में भविष्यवाणी करने वाले को क्या खुद का भविष्य नही दिखाई दिया कि वह जल्द ही जेल की सलाखों के पीछे जाने वाला है। इस तरह के ढोंगी महिलाओं की भावनाओं से खेलकर अनैतिक व्यवहार करते हैं। ऐसा नहीं है कि अशोक खरात ही एक नहीं है, देश में धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले अनेक ढोंगी नजर आ जायेंगे, जो भविष्य वक्ता होने के साथ धर्म के ठेकेदार बने हुए हैं। आमजन को ऐसे ढोंगियों की कुटिल चालों को नाकाम करने के लिए आगे आना चाहिए।

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