कल अजमेर की आम सभा में स्थिति साफ हो गई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रक्षाबंधन का तोहफा बहन वसुंधरा राजे को ताजपोशी कर देने वाले हैं क्योंकि भाजपा शासन में आलाकमान जैसी कोई चीज नहीं, पर्ची से मुख्यमंत्री बनते हैं और जल्द ही वसुंधरा राजे की पर्ची लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह रवाना होंगे, लेकिन ज्यों ही यह सनसनी खबर उन नेताओं तक पहुंची, जो संगठन में रहकर भी खुद को मुख्यमंत्री से कम नहीं समझते, वे सकते में आ गए कि अब गृह जिले झुंझुनूं में जायेंगे तो गुलदस्तों व फूल मालाओं का टोटा पड़ जायेगा। यह खबर सुनते ही राजेन्द्र राठौड़ राज्यसभा में जाने की जुगत कर रहे हैं क्योंकि पहले ही उनके मोरिया बुलाने वाले गोविंद सिंह डोटासरा मौजूद थे। अब तो वसुंधरा राजे के आने के बाद राजस्थान में राजनीति करना मुश्किल हो जाएगा, इसलिए दिल्ली राज्यसभा में जाने के जुगाड में है। अब इस खबर को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान आया है कि अब मेरे राजनीतिक कद की नेता मुख्यमंत्री बनने वाली है, अब विधानसभा सत्र में विधानसभा में आना सार्थक होगा क्योंकि पर्ची मुख्यमंत्री के होते विधानसभा में आना मेरे राजनीतिक कद के अनुरूप नहीं है। सूत्रों की मानें तो पंडित भजन लाल शर्मा को भी आभास हो गया कि अब यशस्वी मुख्यमंत्री का खिताब जाने वाला है, इससे चिंतित होकर गिरिराज की परिक्रमा को निकल पड़े हैं और आनन फानन जल्द ही विप्र कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन की भी सोच रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि कुर्सी पर बैठे है तो समाज को भी कुछ देना ही चाहिए। इस खबर को लेकर उन मंत्रियों व संगठन के नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें है, जो रोज मुख्यमंत्री की फोटो के साथ सौशल मिडिया पर उनको महिमान्वित कर कुर्सी बचाने में लगे थे और सूत्रों की मानें तो उन पोस्टों को डिलिट करने का मानस बना लिया है, जिससे वसुंधरा राजे मंत्रिमंडल में जगह मिल सके। राजस्थान की अफसरशाही में भी इस खबर से हड़कंप मचा हुआ है कि मलाईदार विभागों से उनकी छुट्टी लगभग तय है। विदित हो राजस्थान की अफसरशाही के रवेयै को लेकर वसुंधरा राजे अपनी नाराज़गी सार्वजनिक मंचों से व्यक्त कर चुकी है। गृह जिले झुंझुनूं की बात करें तो राजेन्द्र भांभू की आखिरी राजनीतिक पारी में लालबत्ती की प्रबल संभावनाएं नजर आ रही है। ओबीसी आयोग के अध्यक्ष पवन मावंडिया का भी राजनीतिक कद बढने व झुन्झुनू की राजनीति में विशेष महत्व मिलने के आसार भी नजर आ रहे हैं क्योंकि पवन मावंडिया उनके कार्यकाल मे दो बार भाजपा जिलाध्यक्ष का कार्यकाल पूरा करने में सफल रहे थे। जिन स्थानीय नेताओं ने प्रभारी मंत्री की यात्राओ पर भारी निवेश किया था कि उनको इसका अच्छा रिटर्न मिलेगा, अब उनके निवेश के डूबने की आशंका नजर आ रही है।
*नोट: उक्त लेख सत्य नहीं सिर्फ व्यंग्यात्मक है क्योंकि बुरा ना मानो होली है।*