पेंशनर्स ने वैद्यता अधिनियम 2025 के विरोध में सौंपा ज्ञापन, मनाया काला दिवस

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): राजस्थान पेंशनर समाज के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी वैद्यता अधिनियम 2025 के विरोध में अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के आह्वान पर काला दिवस मनाया। इस दौरान पेंशनर्स ने एसडीएम प्रीति मीणा को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपकर इस अधिनियम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। पेंशनर समाज ने बताया कि यह अधिनियम 25 मार्च 2025 को बिना किसी पूर्व सूचना के वित्त विधेयक के रूप में लोकसभा से पारित कराया गया था, जो पेंशनर्स के हितों पर कुठाराघात है। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम केंद्र सरकार को अपने पेंशनर्स का वर्गीकरण करने एवं उनके बीच अंतर बनाए रखने का अनुचित अधिकार देता है। यदि यह लागू होता है, तो सेवानिवृत्ति की तिथि के आधार पर पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव होगा एवं पुराने पेंशनर्स वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे। यह कानून सामाजिक न्याय एवं सुरक्षा के खिलाफ है, साथ ही यह डीएस नाकरा बनाम भारत संघ मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक फैसले का भी उल्लंघन करता है, जिसमें न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान वाली पीठ ने पेंशन को एक सामाजिक कल्याणकारी व्यवस्था व पेंशनर्स का अधिकार बताया था। अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के निर्णय के अनुसार, इस काले कानून के लागू होने का एक वर्ष पूरा होने पर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। पेंशनर्स ने मांग की है कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में भी सातवें वेतन आयोग की तरह ही सभी पूर्व पेंशनरों के बीच समानता का सिद्धांत बरकरार रखा जाए एवं 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को होने वाली अपूरणीय क्षति से रोका जाए। राजस्थान पेंशनर समाज ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों से संबंधित इस विवादास्पद अधिनियम को वापस नहीं लिया गया, तो पेंशनर समुदाय में भारी रोष व्याप्त रहेगा। ज्ञापन देने वालों में संघ के अध्यक्ष पूर्णमल वर्मा, शंकरलाल हाथीवाल, ज्ञानचंद सोगाणी, रामेश्वर पोसवाल, देवालाल गुर्जर, बहादुर सिंह राजावत, विमल सोगाणी, मास्टर मदनलाल वर्मा, रामकरण लोधी, हरिनारायण गुर्जर, बाबूलाल कंवरिया, कैलाश चैधरी, हरिनारायण हाथीवाल, मोहनलाल सालोदिया, हीरालाल गुर्जर, लक्ष्मीनारायण बैरवा, लल्लूलाल जांगिड़ एवं रामफूल गुर्जर सहित कई पेंशनर्स मौजूद थे।

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