दुर्लभ बीमारियों चिकित्सा के लिए चिकित्सकों के साथ आम जन में जागरूकता आवश्यक: डॉ.कुलदीप सिंह-एम्स, जोधपुर

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (विजय कपूर): भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, (एम्स) जोधपुर (बवम) दुर्लभ बीमारियों, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक विभाग एवं बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को रानी बाजार के होटल मरुधर पैलेस परिसर मे ’’दुर्लभ बीमारियां, कारण व उपचार विषयक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेजिडेंट चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
एम्स जोधपुर के बाल एवं शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.कुलदीप सिंह ने कहा कि है दुर्लभ बीमारियों की पहचान, चिकित्सा एवं रोकथाम के लिए चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ आम लोगों में जागरूकता आवश्यक है। भारत व राजस्थान सरकार अपने स्तर पर दुर्लभ बीमारियों की रोकथाम के लिए विभिन्न योजनाओं से आर्थिक सहयोग कर चिकित्सा सुविधा सुलभ करवा रही है। लोग अंध विश्वासों, अधिक व्यय व चिकित्सा में समय अधिक लगने की समस्या के कारण सही तरीके से अपने बच्चों का इलाज नहीं करवा रहे है। दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित बच्चों के रोग की समय पर पहचान कर सही तरीके से इलाज करवाने पर वे सामान्य जीवन जी सकते है। उन्होंने शोध पूर्ण स्लाईड के माध्यम से दुर्लभ बीमारियों के कारण व उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों के प्रश्नों के उतर दिए तथा एम्स जोधपुर की ओर से दुर्लभ बीमारियों की रोकथाम के लिए की जा रही चिकित्सा सुविधा की जानकारी दी। एम्स जोधपुर के एम्स जोधपुर के बाल एवं शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.कुलदीप सिंह, अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ.वरुणा व्यास ने स्लाइड शो के माध्यम से कहा कि दुर्लभ बीमारियां आमजन के लिए दुर्लभ होती हे, लेकिन जो रोगी प्रभावित है, उसके लिए वह बीमारी दुर्लभ नहीं है। सही जांच के जरिए बच्चों को सही उपचार देना जरूरी है, जिससे परिवार में भविष्य में कोई दूसरा बच्चा दुर्लभ बीमारी से ग्रसित नहीं हो सके। सही जांच, चिकित्सा से ही रोगी व उनके परिजनों को राहत मिल सकती है। एम्स जोधपुर की डॉ.चारू शर्मा ने कहा कि स्त्री के गर्भ में ही बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी की सुविधा विकसित हो गई है। गर्भधारण के बाद नियमित जांच करवाने, कोई संशय होने पर पूर्ण ईलाज करवाने से बच्चे दुर्लभ बीमारियों से बच सकते है। एम्स जोधपुर के ही डॉ.सीताराम डीडेल ने भी दुर्लभ बीमारियों की पहचान व चिकित्सा की जानकारी दी।
पीबीएम अस्पताल के बाल एवं शिशु रोग अस्पताल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ.जीएस तंवर ने बताया कि डॉ.जीएस तंवर ने राजस्थान में दुर्लभ रोगों की स्थिति का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विश्वभर में लगभग 35 करोड़ लोग दुर्लभ रोगों से प्रभावित हैं, जिनमें से लगभग पाँचवां हिस्सा भारत से है। उन्होंने जानकारी दी कि विश्व स्तर पर लगभग 7,000 प्रकार के दुर्लभ रोगों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन इनमें से केवल 63 रोगों के लिए ही स्वीकृत उपचार उपलब्ध हैं। लगभग 80 प्रतिशत दुर्लभ रोग आनुवंशिक (जेनेटिक) होते हैं। किसी रोग को दुर्लभ तब माना जाता है जब वह 2,000 व्यक्तियों में से एक को प्रभावित करता है। डॉ.तंवर ने दुर्लभ रोगों के निदान में होने वाली “डायग्नोस्टिक ओडिसी” की समस्या पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सही निदान होने में बच्चों के जीवन के 7 से 10 वर्ष व्यर्थ हो जाते हैं। परिणाम स्वरूप बचपन का एक बड़ा हिस्सा बिना उचित उपचार के बीत जाता है और कई बच्चों को गलत रूप से दीर्घकालिक रूप से बीमार समझ लिया जाता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए उन्होंने चिकित्सकों और शिशु रोग विशेषज्ञों से दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूक रहने तथा समय पर सही निदान एवं उचित संस्थान में रेफरल सुनिश्चित करने का आह्वान किया।सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ रोगों के नोडल अधिकारी डॉ.तंवर ने बताया कि राजस्थान से 302 मरीजों का पंजीकरण आईसीएमआर में किया गया है, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत मामले डीएमडी (ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) के हैं। इसके लिए प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को नियमित रूप से डीएमके क्लीनिक संचालित किया जाता है। मरीज इस क्लिनिक में पंजीकरण करवा सकते हैं तथा मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना का लाभ ले सकते हैं, जिसके अंतर्गत प्रभावित बच्चों को राजस्थान सरकार की ओर से प्रति माह 5,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। डॉ.तंवर ने बाल रोग विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सकों में दुर्लभ रोगों के प्रति सामान्य ज्ञान बढ़ाने और नैदानिक सतर्कता विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि शीघ्र पहचान और बेहतर उपचार संभव हो सके। मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त प्राचार्य डॉ.एनएल महावर ने एम्स जोधपुर में दुर्लभ रोगों के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने करने पर डॉ.कुलदीप सिंह को टीम को बधाई दी। उन्होंने इस प्रतिष्ठित कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्रो.डॉ.जीएस तंवर के अकादमिक नेतृत्व की भी सराहना की। कार्यशाला में अनेक वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की। जिनमें डॉ.पीसी खत्री, डॉ.सीके चाहर, डॉ.पीके बेरवाल, डॉ.रेणु अग्रवाल, डॉ.गौरव गोम्बर, डॉ.श्याम अग्रवाल, डॉ.मुकेश बेनीवाल, डॉ.सारिका स्वामी, डॉ.एमजी चौधरी, डॉ.पवन दारा, डॉ.विजय चलाना, डॉ.अनिल दूसा, डॉ.ओपी चाहर, डॉ.गौरी शंकर जोशी, डॉ.गिरीश प्रभाकर, डॉ.मोहन काजला, डॉ.कुलदीप बिठू, डॉ.सीके चाहर, डॉ.महेश शर्मा, डॉ.एमजी चौधरी, डॉ.संतोष खजोटिया, डॉ.स्वाति कोचर तथा डॉ.मोनिका सोनी शामिल रहे। कार्यशाला के महत्व को डॉ.अनुभव चौधरी, डॉ.दिव्या एवं डॉ.साक्षी ने बताया। इस अवसर पर कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले चिकित्सकों का विशेषकर डॉ.कुलदीप सिंह का साफा, प्रशस्ति पत्र व शाल से सम्मान किया गया।

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