एनआरसीसी द्वारा कोटड़ी गांव में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद आयोजित

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा बीकानेर के जोड़बीड़ क्षेत्र के गांव कोटड़ी में 'अनुसूचित जाति उप-योजना' (एससीएसपी) के तहत एक दिवसीय पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित किया गया। शिविर में 100 से अधिक महिला व पुरुष पशुपालकों को लाभान्वित किया गया। शिविर में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.बसंती ज्योत्सना ने ऊँटनी के दूध के औषधीय गुणों, उच्च पोषण मूल्य, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तथा गुणवत्ता संरक्षण आदि की जानकारी देते हुए कहा कि वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर ऊँटनी के दूध को एक लाभकारी एवं सतत दुग्‍ध उद्यम के रूप में विकसित किया जा सकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.प्रियंका गौतम ने समेकित कृषि प्रबंधन, संतुलित पशु पोषण एवं गुणवत्तापूर्ण चारा उत्पादन की उन्नत तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योजनाबद्ध हरे चारे की खेती और संतुलित आहार प्रबंधन से पशुओं के स्वास्थ्य व दुग्ध उत्पादन में सुधार कर पशुपालक अपनी आय बढ़ा सकते हैं।केंद्र निदेशक डॉ.अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्यम से अपनी बात पहुंचाते हुए कहा कि पशुपालक नवीन तकनीकों को अपनाकर अपने पशुधन से अधिक उत्पादन व आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से ऊँटनी के दूध, उसके मूल्य संवर्धित उत्पादों तथा औषधीय उपयोगिता का उल्लेख करते हुए प्रदेश में ऊँट दुग्ध आधारित उद्यमिता की व्यापक संभावनाएँ बताई। साथ ही पर्यटन में ऊँटों की बढ़ती उपयोगिता को रेखांकित कर इसे आय का सशक्त साधन बताया तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।इस अवसर पर पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.काशीनाथ ने पशुओं में पाए जाने वाले प्रमुख संक्रामक एवं चयापचयी रोगों की पहचान, रोकथाम और उपचार की जानकारी देते हुए नियमित टीकाकरण, कृमिनाशक व समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण को पशुधन संरक्षण के लिए अनिवार्य बताते हुए पशुपालकों को जागरूक रहने की बात कही। केन्द्र की एससीएसपी उप-योजना के नोडल अधिकारी मनजीत सिंह ने उप-योजना के उद्देश्य, महत्त्व एवं एनआरसीसी की प्रसार गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर पशुपालकों को मिनरल मिक्सचर, पशु दाना व औषधि किट निःशुल्क वितरित किए गए तथा सामाजिक सहभागिता के तहत 72 छात्र-छात्राओं को स्कूल किट प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंत में पशुपालकों ने वैज्ञानिकों से सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया और एनआरसीसी बीकानेर के प्रति आभार व्यक्त किया। केन्‍द्र के डिंपल ने पंजीयन आदि कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

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