कोटपूतली: मोहल्ला बड़ाबास कोटपूतली में डुंगावाले बालाजी मंदिर के सामने श्री डूँगावाले मंदिर के महंत मनीष पुजारी के द्वारा विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करवाकर होली का डांडा रोपण किया गया। हिंदू जागरण मंच नगर संयोजक जितेन्द्र जोशी ने बताया कि होली के उत्सव की शुरुआत डांडा रोपण के साथ होती है। डांडा का अर्थ है एक लकड़ी या स्तंभ। जिस स्थान पर होलिका दहन किया जाता है, उस जगह पर कुछ दिन पहले एक लकड़ी रोपी जाती है, जिसे होली का डांडा कहते हैं। फिर इसके चारों तरफ लोग लकड़ियां, उपले और सूखे पत्ते इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं, जिससे होलिका का ढेर बन जाता है। फिर इस ढेर को होलिका दहन के दिन शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है लेकिन होलिका जलाने से पहले डांडे को निकाल लिया जाता है क्योंकि इस डांडे को भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है। कई जगहों पर लोग दो डांडा भी रोपते हैं, जिनमें से एक को प्रहलाद का प्रतीक तो दूसरे को होलिका का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन के समय प्रहलाद के प्रतीक डांडे को निकाल लिया जाता है और होलिका के डांडे को जलने दिया जाता है। इसी परम्परा के साथ हर वर्ष की भांति माघ पूर्णिमा को डांडे का रोपण किया गया। जिसमें मोहल्ले से
रघुवीर मीणा, संतोष मीणा, मयंक मीणा, बलवीर पायला, राजू पायला, नरेश मीणा,
घनश्याम शर्मा, विनोद शर्मा, विनोद जोशी, जितेन्द्र जोशी, लाला राम मीणा, शिवलाल मीणा एवं अन्य बहुत से स्थानीय निवासी उपस्थित रहे।