बीकानेर (विजय कपूर): अजित फाउण्डेशन द्वारा संवाद श्रृंखला के तहत ‘‘पर्यावरण एवं समाज’’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डूंगर कॉलेज के समाजशास्त्र के व्याख्याता एवं पर्यावरणविद् प्रो.श्याम सुन्दर ज्याणी ने कहा कि हम पर्यावरण से जो कुछ ले रहे है, उसको उपकार के रूप में स्वीकारें तथा उसके प्रति सद्भाव रखें। पर्यावरण के संवर्द्धन से ही स्वच्छ समाज की परिकल्पना की जा सकती है। वर्तमान में आधुनिकता की दौड़ में हम रहन-सहन एवं खान-पान से तो आधुनिक हो रहे है लेकिन विचारों से नहीं। प्रो.ज्याणी ने कहा कि जब तक व्यापक विचार एवं तार्किक चेतना का विकास समाज में नहीं होगा, तब तक समाज में सुदृढ़ता नहीं आ सकती। हम पर्यावरण एवं समाज को पृथक-पृथक नहीं आंक सकते दोनो एक-दूसरे के पूरक है। प्रो.ज्याणी ने कहा कि हमें सैद्धान्तिक शिक्षा के साथ-साथ प्रायोगिक शिक्षा का ज्ञान भी होना आवश्यक है। उन्होंने पर्यावरण को लेकर आने वाली दिक्कतों की तरफ ईशारा करते हुए कहा कि हमें अपने लोक जीवन एवं लोक संस्कृति के प्रति सजग होना चाहिए तभी हम अपने आस-पास के पर्यावरण एवं सामाजिक मूल्यों को संरक्षित रख सकते है। हमारे द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास एक दिन व्यापक रूप लेते है तथा उससे आने वाली पीढ़ियां पोषित होती है। हम अपनी जड़ो से जुड़कर ही पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छ समाज जैसे कार्यों को सतही स्तर पर कर सकते है। कार्यक्रम समन्वयक संजय श्रीमाली ने कहा कि जिस वृक्ष की जड़े हरी रहती है, वहीं वृक्ष वट वृक्ष बनता है तथा उसकी छांव में समाज फलता-फूलता है। जब तक हम शिक्षा को जीवन में आत्मसात नहीं करते तब तक उस शिक्षा का हमारे जीवन में कोई महत्व नहीं रहता। हमें आने वाली पीढ़ि को सशक्त बनाना है तो उनको मानसिक चेतना एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के प्रति संलग्न करना होगा। कार्यक्रम में राजस्थान महिला शिक्षक प्रशिक्षक महाविद्यालय की डॉ.रश्मि बिस्सा एवं डॉ.सन्तोष बिस्सा ने अपने विचार रखे। इसी क्रम में डॉ.रितेश व्यास ने खेजड़ी आन्दोलन की व्यापकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में प्रो.नरसिंह बिन्नानी, डॉ.मोहम्मद फारूक, नवनीत आचार्य सहित राजस्थान महिला शिक्षक प्रशिक्षक महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रही। कार्यक्रम के अंत में षिक्षाविद् प्रो.नरसिंह बिन्नानी ने संस्था की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित कर सभी का आभार जताया।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
लोक संस्कृति से जुड़ कर हम पर्यावरण संरक्षण कर सकते है: प्रो.ज्याणी
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February 17, 2026
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