तीन दशक की नि:स्वार्थ सेवा का अंत

AYUSH ANTIMA
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एक मृदुभाषी, विनम्र और नेक इंसान की मृत्यु न केवल समाज में गहरा शौक लेकर आती है बल्कि उनकी स्मृतियां, नेक काम और शालीन व्यवहार हमेशा लोगों के दिलों में जिवित रहता है। ऐसे व्यक्तियों का नि:स्वार्थ भाव जीवन और विनम्रता समाज के लिए मिसाल बन जाती है। विनम्रता मानव जीवन का एक ऐसा गुण है, जो जीवन में उपलब्धियों के बावजूद जमीन से जोड़े रखता है। ऐसी महान आत्माएं आमजन के दिलों मे मरणोपरांत भी अपनी अमिट छाप जोड़कर जिवित रहती है। ऐसी महान् आत्माओं की कमी समाज और परिवार में हमेशा महसूस की जाती है लेकिन उनकी सकारात्मक स्मृतियों के रूप में जिंदा रहती है। विनम्रता एक अच्छे डाक्टर का प्राथमिक गुण होता है, जो अहंकार त्याग कर रोगी से सहानुभूतिपूर्ण संबंध बनाता है। यह कौशल डाक्टर और रोगी के बीच की दूरी को कम करता है और चिकित्सकीय परिणामों को स्वीकार करता है। चिकित्सा क्षेत्र में विनम्रता केवल व्यवहार ही नहीं बल्कि एक उच्च स्तरीय पेशागत दृष्टिकोण है, जो आत्मविश्वास के साथ साथ करूणा भी बनाए रखता है। इन्हीं गुणों से भरपूर व्यक्तित्व के धनी बिरला सार्वजनिक अस्पताल पिलानी के चिकित्सक डॉ.पाल साहब अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर देवलोक गमन कर गये। मृदुभाषी, विनम्रता की मूर्ति, मिलनसार व्यक्तित्व के धनी डॉ.पाल साहब का निधन सर्व समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। तीन दशकों तक बिरला सार्वजनिक अस्पताल में निस्वार्थ भाव से सेवा देने वाले डाक्टर पाल साहब का असामायिक निधन पीड़ादायक ही नहीं बल्कि स्तब्ध करने वाला है। बिरला सार्वजनिक अस्पताल के निदेशक डॉ.मधुसूदन मालानी ने उनके असामायिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी महान् आत्मा सदियों में जन्म लेती है, उनका निधन सर्व समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई करना असंभव है। इसके साथ ही बिरला सार्वजनिक अस्पताल परिवार ने भी उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) परिवार की ओर से दिवंगत आत्मा को सादर श्रद्धांजलि व ईश्वर से प्रार्थना है कि शौक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की क्षमता प्रदान करें।

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