व्यक्ति देश से बड़ा हो गया

AYUSH ANTIMA
By -
0


अतीत में हम देखें तो कांग्रेस की तूती बोलती थी। देवकांत बरुआ ने एक नारा दिया था कि इंदिरा इज इंडिया व इंडिया इज इंदिरा यानी यह वह समय था कि व्यक्ति देश से बड़ा हो गया, तत्पश्चात जो इंदिरा जी को देश की जनता ने नकार कर उनके बडबोले नेताओं का जबाब दिया। राजनीति में विरोध के स्वरों को स्थान मिलना चाहिए। निसंदेह ही पक्ष व विपक्ष को मर्यादित आचरण के साथ विरोध करना चाहिए, जो इस लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सभी को विचार व्यक्त करने का मौलिक अधिकार भी है।‌ देखा जाए तो कुछ नेता मोदी का विरोध भारत का विरोध के रूप में देख रहे हैं व उनका या भाजपा का विरोध देशद्रोही की संज्ञा में आने लगा है, जो हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए ख़तरनाक स्थिति है। संसद अमर्यादित आचरण की पाठशाला बन गई है। आखिर हमे सोचना होगा कि हमने जिस जनप्रतिनिधि का चुनाव किया, क्या यह सही निर्णय था। इस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर हमें खुद ही देना होगा। आधारहीन आरोप प्रत्यारोपो से संसद बाधित की जा रही है। सत्तारूढ़ दल इतना आत्ममुग्ध है कि जनता को 2047 के विकसित भारत के सपनों की सैर करवाई जा रही है। अतीत में देश के विकास का खाका पंचवर्षीय योजनाओं के जरिये खींचा जाता था लेकिन अब भाजपा शासन वाले हर राज्य में 2047 को देखकर बजट बनाए जाने लगे है। संसद में विगत पचास वर्षों में घटित घटनाओं पर तो चर्चा की जा सकती है लेकिन नौ वर्ष पुरानी घटना का उल्लेख करना मनाही है क्योंकि पिछले एक दशक से देश में अमृत काल चल रहा है। संसद हो या विधानसभा जनता के मुद्दे नदारद है और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में समय जाया किया जा रहा है। किसी भी राजनीतिक दल को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि सत्ता उसका जन्म सिद्ध अधिकार है। भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में सत्ता अंको का खेल होती है और अंक पलटते देर नहीं लगती। जिन अंग्रेजो के शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता था, उनकी पौशाके आज बैंड बाजे वालो की शोभा बढ़ा रहे हैं।‌ भूतकाल को कोसने की बजाय वर्तमान की समीक्षा कर भविष्य की और ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। मेरी कमीज़ तेरी कमीज़ से सफेद है, इस प्रवृत्ति का त्याग करना होगा। राजनीति की काली कोठरी में कोई भी नेता बेदाग नहीं है, ईमानदार वहीं है जब तक पकड़ा न जाए। एक सुप्रसिद्ध कवि का एक व्यंग्य मुझे याद आता है कि एक सज्जन ने उनसे कहा कि आप सरकार पर बहुत ही कटाक्ष करते हैं, कहीं ईडी का छापा पड़ गया तो मुश्किल हो जाएगी तो कवि ने कहा कि मेरे यहां तो उन्हें प्रेमचंद के गबन उपन्यास ही मिलेगा और ज्यादा हुआ तो सतारूढ़ दल की सदस्यता ग्रहण कर लेगे। यानी इस देश में ईमानदारी का सर्टिफिकेट लेना हो तो सत्तारुढ़ पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर लो, आपके सारे पाप धुलकर पाक साफ हो जायेगे क्योंकि यह वह मशीन है कि एक तरफ बेईमानी व भ्रष्टाचार डालो दूसरी तरफ ईमानदारी निकल कर आयेगी।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!