झुंझुनू (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): मंडावा तहसील में घुमन्तु एवं अर्ध-घुमन्तु समुदाय के लिए आयोजित विशेष कैंप ने संवेदनशील प्रशासन का मानवीय चेहरा उजागर किया है। वर्षों से पहचान, अधिकार और सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाने वाले परिवारों के लिए यह कैंप आशा और विश्वास की नई शुरुआत बनकर सामने आया।
कैंप के दौरान एक घुमन्तु परिवार का अत्यंत मार्मिक प्रकरण सामने आया, जिसमें तीन मासूम बच्चों और उनके पिता के पास जन्म प्रमाण पत्र सहित कोई भी वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं था। दस्तावेजों के अभाव में बच्चों का विद्यालय में प्रवेश संभव नहीं हो पा रहा था, जिससे उनका भविष्य अंधकार की ओर बढ़ता जा रहा था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उपखंड अधिकारी मुनेश कुमारी ने संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रकरण का तत्काल संज्ञान लिया। बच्चों की शिक्षा बाधित होने की सूचना को गंभीर मानते हुए उन्होंने बिना किसी विलंब के जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए। ग्राम विकास अधिकारी गुंजन बाला द्वारा मौके की वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए की गई अनुशंसा के आधार पर तहसीलदार डॉ.सुरेन्द्र भास्कर एवं नायब तहसीलदार मुकेश सिहाग ने प्रशासनिक सहानुभूति का परिचय देते हुए तीनों बच्चों तथा उनके पिता सुनील कुमार के जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की अनुज्ञा प्रदान की। यह पहल केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उन बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने वाला मानवीय और संवेदनशील कदम है। अब यह परिवार शिक्षा, पहचान और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ने की ओर अग्रसर होगा। मंडावा तहसील द्वारा आयोजित यह कैंप सामाजिक न्याय, करुणा और सुशासन का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है, जो घुमन्तु एवं अर्ध-घुमन्तु समुदाय के लिए विश्वास, सम्मान और अधिकारों की मजबूत नींव रखता है।