हिन्दुत्व व संगठित समाज को लेकर दोहरे मापदंड

AYUSH ANTIMA
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मुम्बई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक समारोह में बोलते हुए संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य सम्पूर्ण समाज को संगठित करना है। इस समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा फिल्म अभिनेता सलमान खान की उपस्थिति को लेकर रही। उनकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि संघ प्रमुख जब सम्पूर्ण समाज की बात करते हैं तो मुस्लिम समाज भी इस सम्पूर्ण समाज का हिस्सा है। सलमान खान को लेकर उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी उनके व्यवहार व पहनावे का अनुसरण करती है। भागवत ने कहा कि भारत भूगोल का नाम नहीं है, भारत स्वभाव का नाम है। यह जोड़ने वाला स्वभाव हमें फिर से खड़ा करना होगा। सबको मिलकर अनुशासन तरीके से देश को बड़ा करना होगा क्योंकि हमारा देश बड़ा होने से दुनिया बड़ी होगी। भागवत ने कहा कि समाज को संगठित, अनुशासित और सशक्त बनाना संघ का मुख्य उद्देश्य है। उक्त बातों को देखें तो संघ यह बात भले ही कहे कि संघ राजनीति नहीं करता और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संघ के नहीं बल्कि भाजपा के नेता हैं लेकिन यह बात गले नहीं उतरती क्योंकि देखा जाए तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तक के फैसले नागपुर की मोहर से ही होते हैं। भाजपा अपने मातृ संगठन के सामाजिक समरसता को लेकर विपरीत दृष्टिकोण रखती है। अभी हाल ही में यूजीसी एक्ट लाया गया, यह समाज में बिखराव का संकेत कहा जा सकता है। इस रेगुलेशन को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देते हुए कहा था कि यदि हम दखल नहीं देंगे तो इसका खतरनाक असर होगा, समाज बंट जायेगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे। भाजपा का यह वोट बैंक के मध्यनजर लाया गया रेगुलेशन मातृ संगठन की नितियों से मेल नहीं खाता है। जब भाजपा का मातृ संगठन संगठित समाज की अवधारणा को लेकर मुखर रूप से बात करता है और उसके विपरीत भाजपा समाज में बिखराव लाकर अपनी कुर्सी बचाने की कवायद करती नजर आती है। इसी क्रम में भाजपा के नेता अखंड भारत व हिन्दू राष्ट्र की बाते करते हैं तो संघ के प्रमुख की बातों में विरोधाभासी होने की बू आती है।

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