संसद भी असुरक्षित

AYUSH ANTIMA
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उपरोक्त बात मै नहीं कह रहा बल्कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कह रहे हैं। ओम बिरला के बयान के अनुसार "मेरे पास ऐसी पुख्ता जानकारी आई है कि कांग्रेस पार्टी के सदस्य प्रधानमंत्री के आसन पर पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते थे। इसको टालने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए। सदन के नेता ने सदन में उपस्थित न होकर मेरे आग्रह को मानकर सदन को अप्रिय दृश्य से बचाया। मैं प्रधानमंत्री का इसके लिए आभार व्यक्त करता हूं।" यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के इस कथन में सच्चाई है तो यह भारतीय लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर काला धब्बा है।‌ राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी चीन की घुसपैठ पर बोलना चाहते थे, जिसकी अनुमति ओम बिरला ने नहीं दी थी। इसको लेकर लोकसभा मे हंगामा शुरू हो गया। इस प्रकरण को लेकर अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा में उपरोक्त वक्तव्य दिया। यदि कांग्रेस सदस्यों द्वारा ऐसे अमर्यादित व्यवहार के संकेत मिले हैं कि प्रधानमंत्री को लोकसभा में आने से डर लगता है तो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारा लोकतंत्र किस दिशा में जा रहा है। जैसा कि अध्यक्ष ओम बिरला कह रहे हैं कि उनके पास पुख्ता सबूत है तो यह मामला जेपीसी को सौंपकर देश के आवाम के सामने लाना चाहिए कि संसद में सदस्य गुंडों जैसा व्यवहार करने पर उतारू हैं। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने अपने लेखों में सांसदों व विधायकों द्वारा संसद व विधानसभाओं में किए जा रहे आचरणों पर अपने लेखो मे बार बार लिखा है कि देश के राजनेताओं की राजनीतिक भाषाई सुचिता रसातल में पहुंच गई है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उनको सरकार की नितियों का विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है लेकिन यह आलोचना संसद के नियमों के तहत ही होनी चाहिए। संसद नियमो से चलती है न कि विपक्ष के नेता की हठधर्मिता से चलेगी।‌ राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से व्यक्तिगत द्वेषपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। उनके आचरण से यही प्रतीत होता है कि उनको देश व जनहित के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है बल्कि राजनीतिक कुंठा से ग्रसित होकर व्यक्तिगत हमलो पर उतर आए है यह स्थिति देश हित में नहीं है। यह इस सदन की मर्यादा रही है कि नेहरु जी व अटल जी में वैचारिक मतभेद होने के बावजूद यह सर्व विदित है कि अटलजी ने कभी भी व्यक्तिगत प्रहार नहीं किया। अब यदि ओम बिरला के कथन का दूसरा पहलू देखें तो जब संसद में प्रधानमंत्री सुरक्षित नहीं तो देश सुरक्षित हाथों में है, यह कहना बेमानी होगा। ओम बिरला के अनुसार सांसद गुंडई पर उतर आए हैं।

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