पिलानी (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): नगर पालिका विद्या विहार पिलानी द्वारा मंदिर माफी की भूमि पर नियम विरुद्ध की गई धारा 90-क की कार्रवाई पर राज्य सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं विशिष्ट सचिव जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने एक आदेश जारी कर मंदिर की भूमि पर किए गए भूमि रूपांतरण (कनवर्जन) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
*क्या है पूरा मामला*
मिली जानकारी के अनुसार, कस्बा पिलानी के खसरा नंबर 739 (रकबा 6.21 हेक्टेयर) की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में 'मंदिर श्री रघुनाथजी वाके देह' के नाम दर्ज थी। यह भूमि 'मंदिर माफी' यानी प्रतिबंधित श्रेणी की श्रेणी में आती है। नगर पालिका विद्या विहार ने 25 अप्रैल 2025 को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90-क के तहत इस कृषि भूमि को गैर-कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग करने की अनुमति जारी कर दी थी। यह अनुमति निम्नलिखित व्यक्तियों के पक्ष में दी गई थी। नीती केडिया पत्नी राकेश केडिया, संतोष केडिया पत्नी गोविंदराम केडिया, गोविंदराम पुत्र मुरारीलाल केडिया, राकेश केडिया पुत्र गोविंदराम केडिया के नाम की थी।
*नियमों के उल्लंघन पर गिरी गाज*
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चूंकि उक्त खसरा नंबर मंदिर माफी की भूमि है, इसलिए यह प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। राजस्थान नगरीय क्षेत्र (कृषि भूमि का गैर-कृषिक प्रयोजन के लिए उपयोग की अनुज्ञा और आवंटन) नियम, 2012 के तहत ऐसी भूमि का रूपांतरण नहीं किया जा सकता।
*निदेशक ने शून्य घोषित की कार्रवाई*
मामले की गंभीरता को देखते हुए, विभाग ने राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 83 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नगर पालिका द्वारा पूर्व में जारी सभी आदेशों को निरस्त कर दिया है। शासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई नियमों के विरुद्ध थी, इसलिए इसे अवैध माना जाता है।