छोटी काशी में 28 फरवरी तक बहेगी ममतामयी मां ऋतंभराजी के श्रीमुख से भागवत कथा की सरिता

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (प्रमोद आचार्य): अयोध्या के राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर एक जमाने में विश्व हिंदू परिषद की फायर ब्रांड वक्ता के रूप में चर्चित रहीं साध्वी ऋतम्भरा अब ममतामयी दीदी मां के नाम से वात्सल्य की प्रतिमूर्ति बन गई है। वे लंबे समय से वृंदावन में वात्सल्य ग्राम नामक आश्रम का संचालन कर रही है। साध्वी ऋतम्भरा बीकानेर प्रवास पर है तथा वे 28 फरवरी तक अपने श्रीमुख से बीकानेवासियों को श्रीमद भगवद गीता का अमृत रसपान कराएंगी। यह आयोजन सनातन धर्म रक्षा समिति के बैनर तले शहर के पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित होगा।

*कलश यात्रा में उमडा जन सैलाब*

साध्वी ऋतंभरा शनिवार सुबह बीकानेर के नाल हवाई अड्डे पर उतरीं। उनके सम्मान में विशालकाय कलश यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा लक्ष्मीनाथ मंदिर प्रांगण से शुरू हुई। इस दौरान महाराष्ट्र से आए एक घोष दल ने शानदार प्रदर्शन किया। शोभायात्रा में आगे आगे महाराष्ट्र के घोष वक चल रहे थे, उनके पीछे 1500 से अधिक महिलाएं एक ही गणवेश में सिर पर कलश लेकर इस यात्रा में शामिल हुई। यह कलश यात्रा बड़ा बाजार, आचार्यों का चौक, मरूनायक चौक, मोहता चौक, तेलीवाड़ा होते हुए दाऊजी मंदिर पहुंची, जहां पहले से मौजूद साध्वी ऋतंभरा एक रथ में सवार हुई फिर शोभायात्रा यहां से जोशीवाड़ा, कोटगेट होते हुए पुरानी जेल रोड स्थित धुनीनाथ गिरी मठ पंच मंदिर पहुंचकर विसर्जित हो गई। यह संपूर्ण यात्रा महामंडल मंडलेश्वर स्वामी विशोकनन्द जी के सानिध्य में संचालित हुई। इस शोभा यात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। इस कलश यात्रा में पर्यावरण प्रेमी सीताराम कच्छावा सपत्नीक भागवत कथा को सिर पर धारण करते हुए चले।

*इन्होंने संभाली व्यवस्थाएं*

बीकानेर में आयोजित हो रहे विश्व शांति महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा के आठ दिवसीय कार्यक्रम की सारी बागडोर सनातन धर्म रक्षा समिति के सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित, कार्यक्रम अध्यक्ष अनिल सोनी, प्रहलाद सिंह मार्शल, राजेंद्र सिंह शेखावत, शैलेश गुप्ता, विजय कोचर, गजेंद्र सिंह राठौड़, सुशील यादव, मंजू यादव, उषा गहलोत, विकास अग्रवाल, पिंकी शर्मा, जयश्री भाटी, सीटू बिश्नोई, वर्षा पंजाबी, उषा गहलोत सहित अनेक लोगों ने व्यवस्था संभाली। 

*धुनीनाथ मठ पंच मंदिर में हुआ जोरादर स्वागत*

यह कलश यात्रा जैसे ही धुनीनाथ गिरी मठ पंच मंदिर पहुंची तो वहां पर स्वामी विशोकनन्द जी के नेतृत्व में साध्वी ऋतंभरा का जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने मौजूद श्रद्धालुओं से कहा की वे सनातन संस्कृति को बनाए रखने के लिए सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि जब तक अपने घर परिवार व समाज में संस्कार जिंदा रहेंगे तभी तक भारत की सनातन संस्कृति जीवित रहेगी। इसलिए आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल न होकर अपनी प्राचीन सभ्यता व संस्कृति पर गर्व करें। यही सनातन धर्म का बीज मंत्र है। हमें गर्व करना चाहिए कि हमारा धर्म सबसे प्राचीन धर्म है, जो विश्व का कल्याण करने का उद्घोष करता है।

*51 जोड़ों ने दी यज्ञ में आहुतियां*

आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ रविवार को 51 कुंडीय महायज्ञ सेवा से हुआ। यह यज्ञ विश्व शांति की मंगल कामना को लेकर आयोजित किया जा रहा है। सनातन धर्म रक्षा समिति के बैनर तले पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में 51 कुंडीय यज्ञ शुरू हुआ। इस दौरान 51 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोचार के साथ यज्ञ की वेदी में आहूतिया दी। इस कारण पूरा कॉलेज ग्राउंड भक्ति मय हो गया।

*पहले दिन बताया श्रीमद्भागवद कथा का सार*

इसके साथ यह पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आठ दिवसीय श्रीमद्भगवद कथा का शुभारंभ हो गया है। पहले दिन साध्वी ऋतंभरा ने श्रीमद्भागवत गीता का सार बताया। उन्होंने कहा कि यह कथा बहुत पवित्र है तथा इसके सुनने मात्र से समस्त पाप कट जाते हैं क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण ने अपने श्री मुख से कही है। इसलिए हर मनुष्य को भागवत कथा सुननी चाहिए तथा इसका अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कथा में बताई गई सांसारिक बातों का विस्तार से वर्णन भी किया।

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