बिना ऑपरेशन घुटनों के दर्द व आर्थराइटिस का इलाज संभव, पीबीएम ट्रोमा अस्पताल में शुरू हुई प्रदेश की पहली OBRC लैब

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर। सरकारी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर (OBRC) लैब का ट्रायल पीबीएम अस्पताल से संबद्ध ट्रोमा अस्पताल में शुरू किया गया। इस आधुनिक तकनीक से घुटनों के दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, टेनिस एल्बो सहित कई हड्डी एवं जोड़ संबंधी रोगों का बिना ऑपरेशन, बिना चीर-फाड़ इलाज संभव होगा।
पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि यह उपचार मरीज के स्वयं के रक्त से तैयार किए गए विशेष कंसन्ट्रेट पर आधारित है, जिससे शरीर में प्राकृतिक रूप से हीलिंग और टिशू रिपेयर की प्रक्रिया तेज होती है। इस तकनीक से ऑस्टियोआर्थराइटिस ग्रेड 1 और 2 के मरीजों को विशेष लाभ मिलेगा। उपचार पूरी तरह निशुल्क रहेगा और इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। साथ ही इस पर निरंतर रिसर्च भी की जाएगी।
ट्रोमा अस्पताल प्रभारी व वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. खजोटिया ने बताया कि पहले दिन पांच मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। यह तकनीक पीआरपी से अलग और अधिक प्रभावी है। अब ट्रोमा अस्पताल में प्रत्येक मंगलवार को इस पद्धति से मरीजों का इलाज किया जाएगा।
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर ने बताया कि ओबीआरसी एक ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें मरीज लगभग एक घंटे में उपचार लेकर घर जा सकता है। इसका उपयोग स्पोर्ट्स इंजरी, शोल्डर, हिप, घुटना, एंकल, प्लांटर फेशियाइटिस, कार्टिलेज व डिस्क संबंधी समस्याओं में किया जाएगा।

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