सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.दुर्गाप्रसाद अग्रवाल के निबंध संग्रह ‘अब और यहाँ’ का विश्व पुस्तक मेले में लोकार्पण

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): निबंध हिंदी गद्य की महत्वपूर्ण विधा है, जिसमें समकाल के स्वर मुखरित होते हैं। डॉ॰दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ऐसे निबंधकार हैं, जिन्होंने निरंतर इस विधा में सृजन किया है। विख्यात कथाकार और ‘समयांतर’ मासिक के संपादक पंकज बिष्ट ने भारत मंडपम में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में हंस प्रकाशन के स्टाल पर डॉ.अग्रवाल के निबंध संग्रह ‘अब और यहाँ’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि इसमें सामाजिक चिंताओं को अभिव्यक्त किया गया है। आलोचक माधव हाड़ा ने कहा कि अग्रवाल के निबंधों को तात्कालिकता की उपज मानना भूल होगी क्योंकि हमारे समय और समाज के जटिल बदलावों को इन निबंधों में लक्षित किया गया है। विख्यात पत्रकार और संपादक अनिल चमड़िया ने लोकार्पण के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन निबंधों में उन विषयों की तरफ भी लेखक की निगाह गई है, जिन पर साहित्य में कम चर्चा होती है। चर्चित कथाकार-उपन्यासकार प्रवीण कुमार ने निबंध विधा के ऐतिहासिक जरूरत बताते हुए कहा कि सरल और सहज भाषा शैली इन निबंधों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। युवा आलोचक और ‘’बनास जन’’ के संपादक डॉ.पल्लव ने कहा कि डॉ.अग्रवाल विगत दो दशकों से नियमित निबंध लिख रहे हैं। उनके निबंधों में समाज, शिक्षा, साहित्य और राजनीति का ऐसा कोई पक्ष नहीं जिसका विवेचन न हुआ हो। कौटिल्य बुक्स के प्रबंध निदेशक सुधीर यादव ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में हंस प्रकाशन के हरेंद्र तिवारी, ठाकुर प्रसाद चौबे सहित अनेक लेखक और पाठक उपस्थित थे।

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