पाठक और राजपुरोहित की वापसी के लिए राज्य सरकार ने लिखा केंद्र को पत्र

AYUSH ANTIMA
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राजस्थान की प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक धार देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर तैनात दो बेहद प्रभावशाली आईएएस अधिकारियों कृष्णकांत पाठक और प्रकाश राजपुरोहित को वापस बुलाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। कार्मिक विभाग द्वारा केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकरण को भेजा गया यह पत्र केवल एक सामान्य पत्राचार नहीं है, बल्कि यह राज्य में एक बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन और सत्ता के गलियारों में शक्ति संतुलन की नई तैयारी का स्पष्ट संकेत है। ​इन दोनों अधिकारियों की पृष्ठभूमि और वर्तमान तैनाती को देखें तो समझ आता है कि राज्य सरकार इन्हें वापस पाने के लिए इतनी उत्सुक क्यों है। अपनी कार्यकुशलता और नीतिगत स्पष्टता के लिए पहचान रखने वाले 2001 बैच के आईएएस अधिकारी केके पाठक वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्हें फरवरी 2024 में प्रतिनियुक्ति पर केंद्र भेजा गया था। पाठक के पास वित्त, राजस्व और उद्योग जैसे भारी-भरकम विभागों को संभालने का लंबा अनुभव है, जिसकी कमी वर्तमान में सचिवालय के स्तर पर महसूस की जा रही है। ​दूसरी ओर, 2010 बैच के आईएएस प्रकाश राजपुरोहित का नाम राज्य के सबसे सक्षम युवा अधिकारियों में शुमार है। राजपुरोहित वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में संयुक्त सचिव जैसे अत्यंत संवेदनशील और प्रतिष्ठित पद पर तैनात हैं। जून 2024 में दिल्ली जाने से पहले उन्होंने जयपुर कलेक्टर के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। तकनीकी प्रबंधन और डेटा-आधारित प्रशासन में उनकी दक्षता को देखते हुए राज्य सरकार उन्हें वापस बुलाकर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) या किसी बड़े प्रोजेक्ट की कमान सौंपने की योजना बना रही है। ​राज्य सरकार का तर्क है कि वर्तमान समय राजस्थान के लिए प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत 'महत्वपूर्ण मोड़' है। 'राइजिंग राजस्थान' जैसे वैश्विक निवेश सम्मेलनों के बाद अब समय उन एमओयू को धरातल पर उतारने का है, जिसके लिए पाठक जैसे अनुभवी नीति-निर्माताओं की जरूरत है। साथ ही राज्य में चल रहे विभागीय पुनर्गठन और नई फ्लैगशिप योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए प्रकाश राजपुरोहित जैसे फील्ड एक्सपर्ट की कमी खल रही है। सरकार का मानना है कि दिल्ली का अनुभव प्राप्त कर चुके ये अधिकारी अब राज्य के विकास की गति को दोगुना करने में सेतु का कार्य करेंगे। ​इस पत्र के प्रेषण के साथ ही यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की नौकरशाही और सीएमओ में एक बड़ा फेरबदल तय है। यदि केंद्र सरकार इन्हें समय से पूर्व कार्यमुक्त करती है, तो यह राज्य की 'कोर टीम' को मजबूती प्रदान करेगा और शासन की कार्यशैली में एक नई ऊर्जा का संचार होगा। यह कदम यह भी दर्शाता है कि भजनलाल सरकार अब शासन के मोर्चे पर अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद और परिणाम देने वाले प्यादों को बिसात पर वापस सजा रही है।

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