जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 8 जनवरी 2026 को शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) को लेकर दिए गए स्पष्ट, विस्तृत एवं बाध्यकारी आदेश के बावजूद राज्य का शिक्षा विभाग अब तक पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। न्यायालय के आदेश के बाद भी सत्र 2025-26 के अंतर्गत लंबित लगभग 44,000 बच्चों के दाखिलों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना, न केवल सरकार और विभागीय उदासीनता को दर्शाता है बल्कि माननीय राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना भी की जा रही है। संयुक्त अभिभावक संघ ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सत्र 2025-26 के दाखिले अब तक पूरे नहीं हुए हैं और इस विषय में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश भी आ चुके हैं, इसके बावजूद पिछले 12 दिनों से पूरा प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। विभाग बच्चों का भविष्य संवारने के बजाय निजी स्कूलों की मनमानियों को संरक्षण देने में लगा हुआ है और चुपचुप तरीके से नए सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जो न केवल अनुचित है बल्कि न्यायालय की भावना और आदेशों के भी सर्वथा विपरीत है। संघ ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल प्रशासन ने पिछले 9 महीने “मामला कोर्ट में है” का बहाना बनाकर आरटीई के अंतर्गत दाखिले नहीं दिए और हजारों बच्चों का भविष्य खराब किया। अब जब 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट का स्पष्ट और अंतिम निर्णय आ चुका है, तो वही स्कूल यह कहकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं कि यह आदेश “अगले सत्र के लिए लागू होगा” तो कुछ स्कूल कह रहे है शिक्षा विभाग से अभी कोई आदेश नहीं आया, जब कोई आदेश आएगा तब देखेंगे। इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा विभाग की चुप्पी और निष्क्रियता कई गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि आदेश लागू नहीं करना था तो विभाग ने अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश क्यों जारी नहीं किए। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा—“यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है कि राजस्थान हाईकोर्ट के ऐतिहासिक व स्पष्ट आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग आंखें मूंदे बैठा है। 44 हजार से अधिक बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है और विभाग नई प्रवेश प्रक्रिया चुपचुप तरीके से प्रारंभ भी कर चुका है। सवाल यह है कि शिक्षा विभाग जब पुराने दाखिले ही नहीं करवा पाया है, वह नए सत्र के दाखिले की प्रक्रिया किस आधार पर शुरू कर रहा है। क्या अदालत के आदेश केवल कागज़ों तक सीमित रह गए हैं। यदि शीघ्र ही लंबित दाखिलों पर कार्रवाई नहीं हुई और नई प्रवेश प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो संयुक्त अभिभावक संघ को मजबूरन आंदोलनात्मक कदम उठाने पड़ेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की होगी।” संयुक्त अभिभावक संघ की स्पष्ट मांग-जब तक सत्र 2025-26 के सभी लंबित दाखिले पूर्ण नहीं हो जाते, जब तक राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों का पूर्ण एवं प्रभावी पालन सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक सत्र 2026-27 की नई प्रवेश प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह अविलंब हस्तक्षेप कर न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित करे, अन्यथा अभिभावकों और बच्चों के हित में संघर्ष को और अधिक तेज किया जाएगा।
राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के 12 दिन बीतने के बावजूद शिक्षा विभाग निष्क्रिय, 44 हजार बच्चों का भविष्य अधर में: संयुक्त अभिभावक संघ
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January 20, 2026
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